सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

आकांक्षा यादव की कविता : साँसें ही न थम जायें

 


मौसम मस्ताना, दिल दीवाना
तुझको पुकारे आ जा
मौसम का सितम है मेरे सनम
अब सह न सकूँगी आ जा।

तेरी बाँहों के झूले में खो लूँ
इतनी सी इजाजत तो दे दे
अब और न तड़पा मुझको
बस मेरा जहां मुझको दे दे।

तेरे सिवा कुछ और नहीं
आता है नजर इन आँखों को
तेरी साँसों का उठना-गिरना
संगीत है मेरे जीवन का।

कह दे तू बस मेरा ही है
जीने का बहाना बन जाये
अब आ भी जा ऐ मेरे सनम
कहीं साँसें ही न थम जायें।

-आकांक्षा यादव
द्वारा - श्री कृष्ण कुमार यादव
निदेशक डाक सेवाएँ
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पोर्टब्लेयर-744101
kk_akanksha@yahoo.com

2 blogger-facebook:

  1. प्रेम की अनुभूतियों को समेटे सुन्दर कविता..आकांक्षा जी को हार्दिक बधाई.
    अब अंडमान से प्रयाग की धरा पर आपका स्वागत है..

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर कविता..बधाई.

    उत्तर देंहटाएं

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