शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

पुस्तक समीक्षा - अधूरी मुहब्बत अधूरा ख्वाब

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पुस्‍तक समीक्षा

समीक्षक : अनन्‍त आलोक

युवा मन के एहसास

प्रत्‍येक युवा दिल में मोहब्‍बत का समन्‍दर हिलोरें लेता है, अन्‍तर केवल इतना है कि अधिकतर नौजवान इस ज्‍वार भाटा में या तो डूब जाते हैं या फिर बह जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो साहिल पर आकर इन हसीन एहसासों को नई दिशा देते हैं और उनको सबका बना देते हैं। ऐसे ही रचनाकार हैं ''अधूरी मोहब्‍बत अधूरे ख्‍वाब'' के कवि अजय चौहान।

इस संकलन में कुल उन्‍नचास नवगीत संकलित हैं। जिसमें अधिकतर मोहब्‍बत के हसीन एहसास हैं। कवि हृदय मोहब्‍बत में मिलन न होने पर भी सकारात्‍मक दृष्‍टिकोण रखते हुए कहता हैं '' हमारा मिलन हो न सका तो क्‍या/ जुदाई का रिश्‍ता तो बना रहेगा।'' आसमान में चमकते तारों के मार्फत कवि कहता है '' अब तो तुम मिलती नहीं/ इन तारों के बहाने हमारी आ़ंखें मिलती तो होंगी।'' मोहब्‍बत में केवल मोहब्‍बत होती है इसमें नफरत का कोई स्‍थान नहीं होता '' कवि के अनुसार '' तल्‍ख होने से पहले/ हँस कर जुदा हो जाएं''।

मोहब्‍बत से इतर एक सामाजिक प्राणी होने के नाते भ्रष्‍टाचार से आहत कवि हृदय पुकार उठता है '' भ्रष्‍टाचार की तेज हवाएं सब उड़ा ले जाएंगी/ न रोका इसे अभी तो रोटी भी न मिल पाएगी।'' घटते सामाजिक मूल्‍यों एवं पथभ्रष्‍ट होते समाज से कवि का विश्‍वास उठ जाता है वह कहता है ''इस दुनिया का काम ही राह भटकाना है/ इस बात को तुम्‍हें समझना होगा।'' अन्‍ना की भ्रष्‍टाचार विरोधी लहर में कवि अन्‍नामय हो जाता है '' भष्‍टाचार को जड़ से उखाड़ दूं /मुझे अन्‍ना बना दे।''

संकलन की सुन्‍दर रचना ''इन्‍तजार रहेगा'' में कवि इस बात को स्‍वीकारते हैं कि प्‍यार कभी मरता नहीं है '' ये वादिया मोहब्‍बत की दास्‍तां सुनाएंगी/ इन वादियों में छुपा मेरा इन्‍तजार रहेगा।'' अन्‍त में प्रगतिवादी विचारधारा रखते हुए, मोहब्‍बत में लाख जख्‍म खाने के बावजूद कवि कहता है अब भी ये दिल मेरे लिए यूँ धड़कता है/ जैसे आ ही नहीं।'' मुझे ये लिखते हुए भी संकोच नहीं कि संकलन की कुछ रचनाओं में बिखराव और दोहराव है जो अभी स्‍वाभाविक भी है। धीरे धीरे स्‍वाध्‍याय एवं स्‍व-संपादन से कलम की धार और तेज होगी।

पुस्‍तक ः अधूरी मोहब्‍बत अधूरे ख्‍वाब

कवि ः अजय चौहान

प्रकाशक ओपन ः कबीर, 323/ 1, नजदीक एस वी एन, नाहन 173022 हि0 प्र0

मूल्‍य ः 150 रू

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अनन्‍त आलोक

आलोक भवन, ददाहू, हिमाचल प्रदेश, 173022

email: anantalok1@gmail.com

Blog: http://sahityaalok.blogspot.com

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  1. हार्दिक आभार रवि जी | आपका स्नेह इसी प्रकार बना रहे |

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