मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

मनमोहन कसाना की कविता - विकास

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विकास

सब कहते हैं .....

विकास विकास विकास

जनता कहती है ................

कहां हो रहा है विकास

नेता कहते हैं कि हो तो रहा है

विकास .............................................

और क्‍या जगह जगह ताजमहल बनवायें!

हां मैं भी कहता हूं

हो तो रहा है विकास !

अब आप ये मत पूछना कि

कहां हो रहा है ?

अजी आप ही देखो ...

आजकल तो

हर जगह विकास ही विकास

चमक रहा है जैसे कि

कपडे को ढंकने के लिए तन है

और और और क्‍या ?

टाईम पास के लिए हर रोज

एक नया बेचारा संग है।

अब आप ही बताईये

हो गयी न विकास की हद

कहां एक ताजमहल के पीछे भागते रहते थे

और अब देखो न ,

कितने ताजमहल घूमते रहते हैं।

जिनकी संगमरमर से भी चमकीली बाहें है

और कपडों को ढकने वाला बदन

वो तो जिन्‍दा ताजमहल है

वाह जी वाह!

विकासशील नहीं विकसित भारत।

 

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लेखक परिचय

जन्‍म . 06. अप्रेल 1990 को वैर राजस्‍थान में।

संप्रति . कई पत्रिकाओं में कहानी और कविता प्रकाशित

जैसे हिमप्रस्‍थ, राजस्‍थान पत्रिका, दैनिक भास्‍कर, बालहंस, मधुमती, एवं अन्‍य। वर्तमान में एक संगीत कंपनी में रीजनल हैड राजस्‍थान के पद पर कार्यरत।

शिक्षा . मैनेजमेंट से स्‍नातक और बी.जे.एम.सी. द्वितीय वर्ष में अध्‍ययनरत।

पता . मनमोहन कसाना

भोडागांव , वैर, जि. भरतपुर

राजस्‍थान 321408

संपर्क . 09672 281 281

email - manmohan.kasana@gmail.com

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