मीनाक्षी भालेराव के दो भजन

भजन
 
सुन लो राम रघुराई,सुन लो राम रघुराई
सरण पड़े की रखियो लाज सदाई
तुम जगत के पालन हारी,
हम सन्तान तिहारी
कंचन काया चाहे मत देना
शोक-रोग से मुक्ति देना
सुन-------------------------------


महल चौबारे चाहे मत देना
भूखे को रोटी दे देने
राहें चाहे मुश्किल दे देना
अंधे को आंखें दे देना
सुन------------------------------


मन्दिर चाहे दूर हो तुम्हारा
भक्तों को पांव दे देना
दर्शन चाहे मत देना हमको
अपनी कृपा सदा रखना
सुन--------------------------------


 
भजन  
कान्हा नहीं माने हाँ
भर-भर ये पिचकारी मारे
चुनरी सारी ये रंग डाले
गोपी ग्वाले सब है निहारे
रगं प्रीत  का सब कह डाले
अखियों-अखियों में ताना मारे
कान्हा ------------------------


पनघट पर मैं कैसे जांऊ
घघरी भर कर कैसे लाउ
विनती करू मैं ,मैं दूँ दुहाई
बरजोरी कर पकड़ी कलाइयां
लाज से मोरी झुक गयी अंखियां
कान्हा------------------------------------

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