शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

मीनाक्षी भालेराव के दो भजन

भजन
 
सुन लो राम रघुराई,सुन लो राम रघुराई
सरण पड़े की रखियो लाज सदाई
तुम जगत के पालन हारी,
हम सन्तान तिहारी
कंचन काया चाहे मत देना
शोक-रोग से मुक्ति देना
सुन-------------------------------


महल चौबारे चाहे मत देना
भूखे को रोटी दे देने
राहें चाहे मुश्किल दे देना
अंधे को आंखें दे देना
सुन------------------------------


मन्दिर चाहे दूर हो तुम्हारा
भक्तों को पांव दे देना
दर्शन चाहे मत देना हमको
अपनी कृपा सदा रखना
सुन--------------------------------


 
भजन  
कान्हा नहीं माने हाँ
भर-भर ये पिचकारी मारे
चुनरी सारी ये रंग डाले
गोपी ग्वाले सब है निहारे
रगं प्रीत  का सब कह डाले
अखियों-अखियों में ताना मारे
कान्हा ------------------------


पनघट पर मैं कैसे जांऊ
घघरी भर कर कैसे लाउ
विनती करू मैं ,मैं दूँ दुहाई
बरजोरी कर पकड़ी कलाइयां
लाज से मोरी झुक गयी अंखियां
कान्हा------------------------------------

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------