मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

मिलन चौरसिया के चंद शेर - आसमां तोड़ने नाहक उठाया पत्थर तेरी एक मुस्कान ही बहुत थी...


   
image

मज़बूत कदम से मंज़िल ए ज़ानिब को बढो ,
फ़िर न कहना रास्ते में पत्थर थे.      

इश्क़ मुश्क़ छुपते नहीं सबसे,
छुपाने वाले पूरा चाँद  छुपा  लेते हैं .

रिश्ते निभाना भी आता नहीं 
सबको निभाने वाले पूरी कायनात निभा लेते हैं .     

आसमां  में सूराख करने को पत्थर क्यों ले लिए ,
एक मुस्कान तेरी काफ़ी थी आसमानों के लिए.   

कोरे कागज़ पर लकीरें कोई भी बना सकता है,
उन लकीरों से बने इतिहास तो कोई बात बने. 

कबतक कोई बेहिस कोई बेख्याल रह सकता.
बेखुदी, फ़ुरकत, और जलालत की मार सह सकता .

जान पर बन आए तो चूहा भी गड़ा देता है दाँत,
फ़िर ए बुजदिलों कि ललकार कैसे शेर कोई सह सकता . 

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------