सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - अंतर

अंतर

फूला काकी अपने पोते को गो माता का महत्व बताती रहती थीं । लेकिन वह एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देता था । एक दिन काकी ने देखा कि गौ माता बैठी हुई हैं और उनका पोता लात मार-मारकर उन्हें उठाने का प्रयास कर रहा है ।

काकी से नहीं रहा गया । बोलीं “नासपीटे तूँ गौ माता को लात मार रहा है । तुझे कहीं बैठारी नहीं मिलेगी” ।

पोता बोला “तुम चुप रहो बस । बताओ गाय और बकरी में क्या अंतर है” ?

काकी उसे गाली देने लगीं और बोलीं “देश और समाज का यही दुर्भाग्य है कि आज तुझ जैसे हजारों लोग हो गए हैं । जिनके मन-मस्तिक में मल की बास भरी रहती है वे गुबरौले भला फूल के मकरंद और मल की गंदगी में क्या अंतर समझेंगे ? गंगाजी और नाले का अंतर गंदी नाली के कीड़े क्या समझेगें” ?

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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