शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

किशन वर्मा की कविता - संघर्ष मय जीवन

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संघर्ष मय जीवन 

तानेबाने से बुना हुआ  है,
फिर भी आगे बढ़ना है....
जीवन रण में कूद पड़े है,
लड़ना है तो लड़ना है......

कदम बढ़ाना  सोच समझकर
फिसलन है इन राहों में....
गिरना है आसान यहाँ  पर 
मुश्किल जरा संभलना है.......

देख के अपना सुखा आँगन   
तू इतना हैरान न हो...
बादल की मर्जी वो जाने 
कब और कहा बरसना है........
 
मोड़  लिया मुंह  राह बदल ली
चार कदम चलने के बाद... 
कल तक वो दावा  करता था 
साथ जन्म भर चलना है.....
 
माना दुनिया ठीक नहीं है
तेरी मेरी नजरों में.....
खुद को यार बदल कर देखो
इसको अगर बदलना है...........!!

Dr.  Kishan Verma
Department of Botany
University of Lucknow
Lucknow- 226 007 (U.P.)

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