गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

दीप्ति मित्तल की कविताएँ

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कुछ बच्चे जवाँ कब होते हैं..

कुछ बच्चे जवाँ कब होते हैं..
सीधे बूढ़े हो जाते हैं..
दुआओं में नहीं माँगे जाते,
यू हीं भिजवाये जाते हैं.....

नन्हे नन्हे जिन हाथों से
कल कंचे खेला करते थे,
भूख की भट्टी से तप कर
वो हाथ झुलस से जाते हैं..
खुले नलों के नीचे जब
उन हाथों से बर्तन धुलते हैं,
झुलसन को सुकूं मिलता होगा...
पर..दिल पथरा से जाते हैं...।

एक ख्वाहिश उभरी हैं दिल में,
ऊँची उडती पतंगों की,
हसरत भरती हैं सीने में,
कुछ खेलों और उमँगों की।
फिर काम को लगती आवाजें,
चुभती सीने में नश्तर सी..
एक बेचैनी सी उठती हैं,
और... मन मुरझा से जाते हैं..।

कल टूट गया था इक गिलास,
बस जैसे कयामत आई थी,
गाली की बारिश ने दिल में
फिर कैसी आग लगाई थी...
चाहा था पलट वो भी जड़ दे
दिल में उठते तूफानों को,
पर उठते हाथों के दरमियाँ,
बस....लफ़्ज़ मिमिया से जाते हैं।

--


          तन्हा दिल

आज फिर शाम से, दिल ये तन्हा हो चला,
कर रहा है वो शिकायत, दे जरा मुझको बहला।
सुबह बीती नैट पर...फिर चैट और ट्विटर किये,
देखे-अनदेखे ना जाने दोस्त कितने बन पड़े।
कितनी बातें कितने चर्चे..कितने अफसाने बयाँ,
चुटकुलों और शायरी से भी थी वो महफिल जवां।         
इतना भर भर के उसे मैंने निवाला दे दिया,
फिर भी कहता दिल मेरा, मैं फिर से तन्हा हो चला।

देखती हूँ, कुछ अजब सी ख्वाहिशें है वो लिये,
चाहे वो, कोई साथ बैठे चाय का प्याला पिये।
हाथ ले कर हाथ में, जो कर सके कुछ गुफ्तगू़,
सामने हो वो नजर के, ये है उसकी जुस्तजू़।
अब कहाँ से लाऊं उसकी ये खुशी,
नैट से तो की थी जो भी दोस्ती,
अपने अपने खोल में सब हैं वो बंद,
रूबरू मिल बैठना किसको पसंद।
सिर्फ लफ्फ़ाजी का होता है, ये जो है सिलसिला,
बाँट ले सुख-दुख मेरा, ऐसा किस में हौसला।
कैसे समझाऊँ उसे मैं..दोस्त सच्चा ना मिला,
आज फिर शाम से, दिल जो तन्हा हो चला।

परिचय

 

नाम - दीप्ति मित्तल

जन्म - 7 अगस्त 1976

मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

शिक्षा – एम. सी. ए.

तीन वर्ष तक बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करने के बाद बढते पारिवारिक दायित्वों के कारण नौकरी छोड लेखन आरम्भ किया और यू.पी. बोर्ड के लिए कम्प्यूटर विज्ञान विषय पर चार पुस्तकें लिखी। फिर सन् 2005 से हिन्दी कहानियॉ और लेख लिखने आरम्भ किये। प्रथम कहानी ‘सीख’ को ‘मेरी सहेली’ पत्रिका की ओर से सर्वश्रेष्ठ कहानी का पुरस्कार मिला। अभी तक लगभग सभी प्रमुख पत्रिकाओं जैसे मेरी सहेली, मेरी संगिनी, वनिता, सरिता, होम मेकर, सखी, बिंदिया, वुमेन आन टॉप, सृजनगाथा.कॉम आदि में 70 से अधिक कहानियॉ, लेख व व्यगं प्रकाशित हो चुके हैं। कविता के श्रेत्र में अभी नयी नयी शुरूआत है।

संपर्क - 403-डाहलिया, न्याति मिडोज, वडगॉवशेरी

पुणे (महाराष्ट्रा), पिन – 411014

 

deeptimittal2@hotmail.com

6 blogger-facebook:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर रचनाएँ ...
    बाल श्रम पर लिखी रचना दिल को छू गयी...

    शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. दीप्ति मित्तल9:07 am

      बहुत बहुत धन्यवाद विद्या जी।

      दीप्ति

      हटाएं
  3. Anurag6:31 pm

    kya baat hai! Abhinandan!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी रचनायें बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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