शुक्रवार, 30 मार्च 2012

अमरीक सिंह कुंडा की लघुकथाएँ - लंगड़ा आम, बिजी डे

कंडे का कंडा

लंगड़ा आम

‘‘पंडित जी, हमारा काम नहीं चलता। यह हमारा टेवा देखिए और हम पर कृपा कीजिए।’’ लाला विष्णु प्रताप ने पंडित से कहा, ‘‘आपकी तो ग्रह चाल ही बुरी है। आप तो आज मरे या बस कल मरे ही समझो। आपका जानलेवा एक्सीडैंट हो सकता है।’’ लाला जी ने याचना भरे स्वर में कहा, ‘‘पंडित जी, कोई उपाय कीजिए।’’

पंडित जी ने कहा, ‘‘ठीक है। तुम आज रात को 11 किलो लंगड़ा आम लंगड़ाते हुए ठीक रात को 9 ११बजे हमारे दरवाजे पर रख जाना और पीछे मुड़ कर मत देखना। याद रखना तुमने लंगड़ा आम लंगड़ाते हुए देकर जाना है। मैं देवताओं को समझा लूंगा और तुम्हारा उपाय कर दूंगा। 9 बजे तक तुम्हारा हवन पूरा हो जाएगा। हवन सामग्री के लिए 2100 रुपए दे जाओ। यह बात किसी को मत बताना, नहीं तो हवन भंग हो सकता है। अब तुम जाओ और जाकर आम खरीद कर रख लो। याद रखना ठीक रात 9 ११बजे आना है।’’ बेचारा विष्णु प्रताप 40 रुपए किलो वाला लंगड़ा आम लेकर रात को 9 ११बजे लंगड़ाते हुए पंडित जी के दरवाजे पर रख कर मुड़ा ही था कि गली के कुत्तों ने लाला की धोती फाड़ दी और उसकी टांग पकड़ ली। इतने में पंडित जी अपने लड़कों के साथ शोर सुन कर बाहर निकले। ‘‘हरे राम, हरे राम।’’ कहते हुए पंडित जी ने लाला जी को उठाया और उनके लड़कों ने कुत्तों को पत्थर मार कर भगा दिया। वे लाला जी को अंदर ले आए और पानी पिलाया। पंडित जी ने आम संभालते हुए कहा, ‘‘देखा लाला जी, आप बच गए। मैं आपका ही हवन करके आया था। चलिए धोती से ही काम बन गया। जाते हुए टैटनस का टीका लगवा लेना।’’ लाला जी ने कहा, ‘‘आप धन्य हो पंडित जी, आपने मेरी जान बचा ली। मेरे लायक कोई और सेवा हो तो बताएं।’’ पंडित जी ने कहा, ‘‘सेवा तो कोई नहीं बस सवा 2 किलो साबुत मांह लेकर महीने के हर पहले शनिवार हमें दे जाया करो। यदि कोई ग्रह बुरा होगा तो वह भी सीधा हो जाएगा।’’ लाला जी पंडित जी के पांव छू कर चले गए। पंडित जी का परिवार लंगड़े आम काट कर खा रहा था। पंडित जी आज लाई 2100 रुपए की रैड नाइट की पेटी में से बोतल निकाल कर पैग लगा रहे थे। 4 पैग पी कर सुरूर में आकर कहने लगे, ‘‘भाग्यवान तू कहा करती थी कि साबुत मांह हमेशा खत्म रहते हैं। मैंने इस का पक्का इलाज कर दिया है। अब लाला हर महीने की शुरूआत में मांह देकर जाएगा। इस तरह के 2-3 और मुर्गे फंस गए तो अपने तो वारे-न्यारे हो जाएंगे।’’

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बिजी डे

‘‘आज मेरा क्या प्रोग्राम है?’’ स्वास्थ्य मंत्री भाटिया ने अपने पी.ए. से पूछा।

‘‘सर, आज थोड़ी बिजी डे है। सब से पहले आपने सुबह की सैर करनी है और उसके बाद ताजे फलों का जूस पीना है। उसके बाद डाक्टर चोटानी के अनुसार घुटनों की दवाई लेनी है। ठीक एक घंटे बाद ब्रेकफास्ट करना है और उसके बाद डाक्टर कुलविन्द्र के पास अपना हार्ट चैक करवाने जाने है। उसके बाद डैंटल स्पैशलिस्ट डा. अमरजीत बिंदर को अपने दांत दिखाने जाना है। सर, उसके बाद आपने लंच लेना है। फिर दो घंटे आराम करना है। शाम को आपने ठेकेदार सैमी साहब के घर चाय पीने जाना है। उसके बाद समाचार पत्र झगड़ू एक्सप्रैस के रिपोर्टर को अपना इंटरव्यू देना है। इंटरव्यू का विषय है आप अपनी बिजी लाइफ से गरीबों के लिए कैसे टाइम निकाल पाते हो। सारी डिटेल मैंने लिख दी है। आप के कहे मुताबिक फोटोग्राफर को भी बुला लिया है। नकली लूले, लंगड़ों तथा कुछ गरीब औरतों को 20-20 रुपए दे कर बुला लिया है। आप ने ये सिलाई मशीनें तथा कुछ हैंडीकैप्ड लोगों को साइकिलें देनी हैं। उसके बाद आप ने होटल दिलरूबा में डिनर करने जाना है।’’ पी.ए. ने दिन की लिस्ट पढ़ कर मंत्री जी को सुना दी।

‘‘आज तो मेरा बहुत बिजी डे है।’’ मंत्री जी ने हंसते हुए कहा।

DR AMRIK SINGH KANDA

1764,GURU RAM DASS NAGAR

MOGA-142001 PB

INDIA

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