मंगलवार, 13 मार्च 2012

शिल्‍पी चौहान का आलेख - बच्‍चे व माता- पिता का व्‍यवहार

 

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‍च्चे घर की शोभा होते हैं। उनकी शरारतें शरारती हंसी व नादानियाँ माता पिता और सगे सम्‍बन्‍धियों का मन मोह लेती हैं। बच्‍चे सरल मन से अपने मन की बात बिना सोचे समझे सबके सामने बोल देते हैं तो उनको बच्‍चे समझकर माफ कर दिया जाता हैं परन्‍तु कभी कभी बच्‍चे के मुँह से निकली हुई बात माता․ पिता के लिए परेशानी का कारण बन जाती हैं। जिससे अभिभावक परेशान होकर बच्‍चों को मारते पिटते हैं जो बाल मन के लिए उचित नहीं हैं। अधिक समझाना भी उनके सिर से उपर निकालना ही होता हैं क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि माता․पिता तो हर समय कुछ न कुछ बताते रहते हैं लेकिन किसी न किसी रूप में बच्‍चों की नादानियों के बारे में बच्‍चों को बताना भी आवश्‍यक होता है।

थोडी सी अकलमन्‍दी से माता․पिता बच्‍चों की इन समस्‍याओं से स्वयं को शर्मिन्‍दा होने से बचा सकते हैं।

बच्‍चों के साथ करें मर्यादित व्‍यवहार

माता-पिता को चाहिए की बच्‍चे छोटे हो या बड़े कभी भी उनके सामने किसी सम्‍बन्‍धी या जान पहचान वालों के बारे में नकारात्‍मक बात न करें।

बच्‍चों के मन में शुरू से ही अनजाने में उन रिश्‍तों में एक दीवार सी बनती चली जाती है जिसे दूर करना माता-पिता के लिए मुश्‍किल हो जाता है।

यह सोचकर भी परिवार में ऐसी बातें न करें की बच्‍चें खेल में मस्‍त हैं उनकी उपस्थिति को कभी भी नजर अन्‍दाज नहीं करना चाहिए। बहुधा हम उनको नजर अन्‍दाज करते हैं और वे कुछ आधी अधूरी बातें सुनकर उनका गलत मतलब निकाल लेते हैं जो माता पिता के लिए भारी पड़ सकता है।

मता-पिता को विशेष ध्‍यान देना चाहिए की जब वे किसी समारोह या किसी के घर आयें तो रास्‍ते में वहाँ कि कमियों के बारे में चर्चा न करे।

उनके खाने व व्‍यवहार आदी को सकारात्‍मक रूप दें कभी नकारात्‍मक रूप न दें क्‍योंकि बच्‍चे भोलेपन में अपने मन की बात बता दें और आपको शर्मिन्‍दगी उठानी पडे।

बच्‍चों के सम्मुख कभी रिश्‍तेदारों में अन्‍तर न करें यदी कोई आपसे फोन पर या सामने बात कर रहा हो तो बच्‍चों के सामने अपने विचार न दें।

· बच्‍चों के सामने क्रोध पर नियन्‍त्रण रखें।

· बच्‍चों के सामने आपस में सम्‍मान से पेश आयें।

· बच्‍चों के गलत व्‍यवहार को अपनी समस्‍या न बनायें व्‍यवहार आयु के अनुसार बदल जाता है।

· बच्‍चों के व्‍यवहार को सुधारने के लिए स्वयं को बदलें।

· बच्‍चों को कभी लालच देकर कार्य न करायें इससे वो काम चोर हो जाते हैं।

· बच्‍चों की अच्‍छी आदत व कार्य के लिए सदैव सराहना करें।

· बच्‍चों को कभी भी शारीरिक दण्‍ड न दें इससे उनके शारीरिक विकास पर गलत प्रभाव पड़ता है।

· माता-पिता को बच्‍चों से ज्‍यादा दूरी नहीं बनानी चाहिए।

अधिकांश माता-पिता को व्‍यवहार समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। अनेक बार माता-पिता बच्‍चों से बहस, झगड़ा, करते हैं और कई बार चिल्‍लाकर या धमकी से भी व्‍यवहार करते हैं। कभी - कभी हम बच्‍चों को उनकी गलतियों पर उन्‍हें सजा भी देते हैं, हम सोचते हैं कि ऐसा सही है लेकिन उसका प्रभाव बच्‍चों पर अच्‍छा नहीं पड़ता है। सबसे अच्‍छा परिणाम प्राप्‍त करने के लिए उसे उसकी गलती महसूस करानी चाहिए। कई बार हम अपने बच्‍चों को दूसरे बच्‍चों के सामने नापसंद करते हैं ऐसा करने से बच्‍चों में घृणा उत्‍पन्‍न हो जाती है।

माता-पिता को चाहिए की बच्‍चों से हमेशा मर्यादित व्‍यवहार करें। जिससे भविष्‍य में उन्‍हें किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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शिल्‍पी चौहान (अनुसन्‍धान कर्त्री)

वनस्‍थली विद्यापीठ (राजस्‍थान)

shilpichauhan.chauhan@gmail.com

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