देवेन्द्र पाठक 'महरूम' की की कविताई/ बधाई ! नव विक्रम संवत्सर,चैती चाँद एवं गुड़ी पड़वा के अवसर पर एक ग़ज़ल

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ग़ज़ल/

अश्क-ए-ख़ून बहाकर ये गुज़र जाएगा |

वो जो आएगा वो भी अश्के ख़ूं बहाएगा ||

 

अब कहीँ फेरो-बदल के कोई आसार नहीँ ;

जलेगा रोम नीरो बाँसुरी बजाएगा ||

 

तरकशो-तीर वही होँगे पर शिकारी नए ;

अधमरोँ का शिकार फिर से किया जाएगा ||

 

हम जिसे कह रहे हैँ आज अलविदा वो ही;

ले नई शक्ल नये ज़ुल्म हम प ढाएगा ||

 

हादसा होगा नए ढंग से ' महरूम ' कोई ;

घाव भरता हुआ फिर से हरा हो जाएगा |

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परिचय-                 देवेन्द्र कुमार पाठक (तख़ल्लुस 'महरूम')          जन्म -02.03.1955;ग्राम-भुड़सा,  ( बड़वारा )जिला-कटनी, म. प्र.में;शिक्षा-M.A.B.T.C.( हिंदी/अध्यापन)प्रकाशित पुस्तकेँ-'विधर्मी', 'अदना सा आदमी' (उपन्यास) 'मुहिम', 'मरी खाल:आखिरी ताल','चनसुरिया का सुख','धरम धरे को दण्ड' (कहानी संग्रह )'दिल का मामला है'( व्यंग्य संग्रह ) 'दुनिया नहीँ अँधेरी होगी' (गीत-नवगीत) व्यवसाय-अध्यापन; संपर्क- प्रेमनगर,खिरहनी.साइन्स कालेज डाकघर,कटनी 483501 म.प्र. ई मेल- devendra.mahroom@gmail.com 

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1 टिप्पणी "देवेन्द्र पाठक 'महरूम' की की कविताई/ बधाई ! नव विक्रम संवत्सर,चैती चाँद एवं गुड़ी पड़वा के अवसर पर एक ग़ज़ल"

  1. .हार्दिक बधाई!
    नव वर्ष पर बधाई को समर्पित ग़ज़ल के लिए .
    एक-एक शे'र हकीकत से रुबरु कराता है.
    चारो ओर फैला भ्रष्ट्राचार ,शोषण ,बेईमानी ने
    आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है.

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