शुक्रवार, 30 मार्च 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा स्वार्थी

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स्वार्थी
रामू मोटरसाइकिल चला रहा था। राज पीछे बैठा था। राज ने अचानक कहा रोको-रोको। रामू ने गाड़ी रोक दिया और बोला क्या हुआ। राज बोला वह देखो उस दुकान में हमारे सर बैठे हुए हैं। जाकर मिल आऊँ। परीक्षा होने वाली है। प्रयोगात्मक परीक्षा की भी डेट आ गई है।
कुछ महीने बाद एक दिन फिर रामू गाड़ी चलाता हुआ जा रहा था। उस दिन भी राज पीछे बैठा था। रामू ने एकाएक गाड़ी रोक दिया। राज ने पूछा गाड़ी क्यों रोक दिया ? रामू बोला वहाँ तुम्हारे सर बैठे हैं। राज बोला चल यार। मैंने परीक्षा पास कर ली है।
रामू ने गाड़ी चला दिया। लेकिन अपने को यह कहने से नहीं रोक पाया कि राज तूँ बड़ा स्वार्थी है।
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डॉ. एस. के. पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.)।
URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/
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