गुरुवार, 8 मार्च 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - बड़ी चीज

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बड़ी चीज

‘जानती हो दुनिया में सबसे बड़ी चीज क्या होती है’ ? मोहन ने रोली से पूछा। रोली बोली ‘भगवान। भगवान से बड़ा और क्या हो सकता है’ ?

मोहन बोला ‘भगवान तो सबसे बड़े हैं ही। लेकिन एक चीज ऐसी है जो भगवान को भी वश में कर लेती है। और मेरा मानना है दुनिया में वही सबसे बड़ी चीज है’। रोली बोली ‘मुझे नहीं पता। तुम्हीं बताओ’।

मोहन बोला ‘प्रेम। यह प्रेम ही तो है जो भगवान को भी वश में कर लेता है। प्रेम ऐसी चीज है जिसके बिना अपने भी बेगाने हो जाते हैं। और यदि प्रेम हो तो बेगाने भी अपने बन जाते हैं। प्रेम की कमी की ही वजह से ही घर और समाज दिनों-दिन टूट रहे हैं। तुम मानो या न मानो लेकिन मेरा मानना है कि प्रेम बहुत ही बड़ी चीज है।

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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(चित्र - मुखौटा कलाकृति - सौजन्य- नव सिद्धार्थ आर्टग्रुप)

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