मोहसिन ख़ान की लघु कथा : ‘यस सर’

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मोहसिन खान

“सर, गलती हो गई।”

अपने बॉस के केबिन में प्रवेश करते हुए कर्मचारी घिघियाते हुए बोला। उसे पता था कि बॉस ने उसे केबिन में क्यूँ बुलाया है।

“केवल दस हज़ार रुपयों के लिए तुम इतना गिर सकते हो !”

बॉस ने क्रोधपूर्वक आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“सर, मेरे बीवी बच्चे हैं, आप अन्नदाता हैं, मैं मर जाऊंगा।”

घबराया सा हाथ जोड़कर बॉस के चरणों में जा गिरा और पैर पकड़कर माफ़ी माँगने लगा।

उस समय बॉस उसका देवता बन गया, कर्मचारी अधम,पापी,पतित और याचक बन गया।

“तुम जैसे लोगों के कारण ही सरकारी विभाग बदनाम हैं। एक तो काम करना आता नहीं है, उस पर से तुम जैसे लोगों की वजह से बदनामी झेलनी पड़ती है।”

बॉस ने कुछ समझौते वाली भाषा और लहजे में कहा। कर्मचारी के हाथों की कुछ पकड़ ढीली पड़ गयी और कुछ क्षणों में झुकी कमर से उठकर मुँह लटकाकर चरण वंदन मूद्रा में निढाल बदन से ढीठ बनकर खड़ा रहा। उसे पता था बॉस तरस खा चुके हैं। ज़्यादा से ज़्यादा गाली देंगे या फिर .....।

बॉस ने कहा- “क्या करें तुम्हारा, चलो ठीक है अब गलती की है तो खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।”

कर्मचारी के शरीर में कुछ जान आ गयी।

बॉस ने कहा- “एक का दो भाव लगेगा याने दस के बीस।”

कर्मचारी ने प्रसन्नता पूर्वक कहा – “यस सर। ”

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प्रेषक :-

डॉ. मोहसिन ख़ान

जे. एस. एम. कॉलेज,

अलीबाग – महाराष्ट्र - 402 201

+919860657970

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