शुक्रवार, 30 मार्च 2012

अमरीक सिंह कंडा की लघुकथाएँ - सियासत, उधार की उम्र

कंडे दा कंडा

सियासत

भेड़ का मेमना नदी की ढलान पर पानी पी रहा था। अचानक उसकी नजर शेर पर पड़ी। शेर भी पानी पीने लगा। मेमने को अपने पड़दादा की कहानी याद आ गई। इसी तरह ही उसका पड़दादा भी एक बार पानी पीने लगा था तो शेर ने उसे यह कह कर कि तुम पानी जूठा कर रहे हो खा लिया था। यह कहानी मेमने की मां ने उसे कई बार सुनाई थी।

मेमना थर-थर कांप रहा था। शेर मेमने के पास आया और कहने लगा,‘‘ बेटे क्या हाल है?’’

‘‘ठीक है अंकल जी।’’ मेमने ने कांपते हुए कहा।

‘‘तुम्हारे माता-पिता का क्या हाल है?’’

‘‘सब ठीक-ठाक है अंकल जी।’’

‘‘तुम अपनी सेहत का ध्यान रखा करो और अपने माता-पिता का भी। समझ गए न बेटे। मुझ तक कोई भी काम हो जब मर्जी चले आना। अभी तो मैं चलता हूं। कई काम पड़े हैं करने वाले।’’

मेमना बहुत हैरान था। उसके माता-पिता तो कहते थे कि शेर अंकल से बच रहा करो परन्तु यह तो बहुत ही अच्छे अंकल हैं। मुझे बेवजह डराते रहे और मैं डरता रहा।

यह सारा दृश्य शेरनी भी देख रही थी। उसने आते ही शेर को गुस्से में कहा,‘‘ मैंने तुम्हें शिकार करने को भेजा था और तुम मेमने के साथ बातें करके आ गए। मुझे कितनी भूख लगी है और तुम नरम-नरम मेमना छोड़ आए?’’

‘‘भाग्यवान, तुम तो पागल हो। अगले सप्ताह जंगल के चुनाव हैं। चुनाव जीत कर हमने जनता को ही तो खाना है।’’ यह सुन कर शेरनी भी मुस्कुराने लगी।

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उधार की उम्र

जब भगवान दुनिया बसाने लगा तो उनहोंने सभी जानवरों, कीड़े-मकौड़ों, पक्षियों तथा मनुष्यों का एक-एक पीस तैयार कर लिया। सब में जान डाल दी। सब को उम्र बांटने लगे। सबसे पहले मनुष्य को भगवान ने कहा, ‘‘ले भई, तेरी उम्र 40 वर्ष।’’ मनुष्य शुरू से ही लालची था। उसने भगवान से कहा, ‘‘बस 40 साल ही भगवन, थोड़ी-सी और उम्र दे दो।’’ भगवान ने कहा, ‘‘भई, मेरे पास तो 40 साल से अधिक कोटा नहीं है। यदि कोई जानवर या पक्षी अपनी मर्जी से तुम्हें अपनी अतिरिक्त उम्र दे दे तो तुम ले लेना। वहां कोने में जाकर बैठ जाओ।’’ भगवान उम्र बांटते जा रहे थे और जानवर तथा पक्षी उम्रें लेकर जा रहे थे।

गधे की बारी आई। भगवान ने कहा, ‘‘भई, तेरी उम्र 40 साल है।’’ गधे ने कहा, ‘‘भगवन, मैंने 40 वर्ष की उम्र का क्या करना है? मैंने कौन-सा अफसर बन जाना है,बोझा ही तो ढोना है। 40 साल बोझा ढो-ढो कर तो मैं मर ही जाऊंगा। मेरी उम्र थोड़ी कम कर दो।’’ भगवान ने कहा, ‘‘भई, मेरे पास जो कोटा है उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता, यदि तुमने उम्र देनी है तो इस मनुष्य को दे दो।’’ गधा अपनी उम्र के 20 साल मनुष्य को देकर चला गया लेकिन लालची  मनुष्य वहीं बैठा रहा।

उसके बाद कुत्ते की बारी आई। भगवान ने उसे भी 40 वर्ष की उम्र दे दी परन्तु कुत्ते ने कहा, ‘‘भगवन, मैं 40 साल लेकर क्या करूंगा? मैंने कौन-सा नेता बनना है। मुझे तो आपने भौंकने की ड्यूटी दी है। मैं तो भौंक-भौंक कर मर जाऊंगा। कृपया मेरी उम्र कुछ कम कर दें।’’ भगवान ने कहा, ‘‘भई, मैं कुछ नहीं कर सकता। तुम उस मनुष्य से बात कर लो।’’ कुत्ते ने उपनी उम्र में से 20 साल मनुष्य को दे दिए परन्तु मनुष्य का पेट फिर भी नहीं भरा और वह बैठा रहा। भगवान ने लगभग सभी को उम्रें बांट दी थीं।

अंत में उल्लू की बारी आई। भगवान ने उल्लू को भी 40 साल दे दिए परन्तु उल्लू ने भी कहा, ‘‘भगवन, एक तो मेरी नस्ल ही अलग है। मुझे दिन की बजाय रात को दिखता है। मैंने अधिक उम्र लेकर क्या करना है। मेरी उम्र में से आधी उम्र किसी अन्य को दे दो।’’ भगवान ने कहा, ‘‘भई, अपनी मर्जी से मनुष्य को दे दो। मैं कुछ नहीं कर सकता।’’ मनुष्य वहीं पर बैठा था। भगवान ने कहा, ‘‘भई, अब तो किसी ने नहीं आना है। मैंने सब को उम्रें बांट दी हैं। तुम अब चले जाओ। मेरी एक बात सुनते जाओ, तुमने इन जानवरों की उम्रें ली हैं। तुम्हें काफी मुश्किल उठानी पड़ेगी। ये उम्रें तुम्हें काफी महंगी पड़ेंगी।’’

आज मनुष्य की सही उम्र 40 साल है। उसके बाद वह गधे की तरह अपने बच्चों के लिए काम करता है। वह सोचता है मैं यह भी कर लूं, वह भी कर लूं। वह बोझा ढोता रहता है। जब वह 60 साल का हो जाता है तो उसका शरीर वृद्ध हो जाता है। वह काम करने योग्य नहीं रहता। वह अपने बच्चों को अच्छी सलाह देता है तो उसके बच्चे उसे कहते हैं, ‘‘क्यों कुत्तों की तरह भौंक रहे हैं?’’ जब वह भौंक-भौंक कर थक- हार जाता है तो कोई भी उसकी बात नहीं सुनता। 80 साल के बाद वह चारपाई पकड़ लेता है, घुटने जवाब दे जाते हैं, वह अपने बहू-बेटों को लड़ते-झगड़ते देखता है। वह बोल नहीं सकता, उठ कर उन्हें छुड़ा नहीं सकता। कोई गलत काम हो रहा हो तो वह टोक नहीं सकता। उसे रात को नींद नहीं आती, वह उल्लू की तरह देखता ही रहता है, बस देखता ही रहता है।... और एक दिन देखना भी बंद हो जाता है।

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