गुरुवार, 8 मार्च 2012

मीनाक्षी भालेराव की महिला दिवस विशेष कविता

महिला दिवस

हिंद की नारी

ये जो ममता से भरी हिंद की नारी है ,

इस को मत ललकारो तुम !

ये कब बन जाये दुर्गा-काली है ,

ठहराव अगर समुद्र सा है तो,

नदियों सी रफ्तार भी है !

शीतल अगर रात सी है तो ,

सूरज सी गर्मी भी इस में !

मिठास अगर मधु जैसी है ,

विष की कडवाहट भी है !

धाराओं सी गर चंचल है तो,

पर्वतों सी अटल भी है!

फूलों सी अगर नाजुक है तो ,

चट्टानों सी मजबूत भी है ये !

मत परखो इस की शक्ति को,

ये शक्ति ही नहीं महाशक्ति भी है !

मिलन

थाम लो ना मुझे, इस कदर तुम बहो

दूरियां-दूरियां ना रहे अहसास पराये ना रहे

जिस कदर के जिस्म-जिस्म में घुलने लगे

सांसों से सांसों का मिलन हो कर रहे

थाम-------------------------------------------------

जिस कदर आसमा की बाँहों में बूँदे रहे  

बरखा धरती से आकर लिपटने लगे

जिस कदर सागर मे मचलती लहरें रहे  

सागर की बाँहों में सिमटती रहे

थाम--------------------------------------------------

जिस कदर रात के आगोश में सपने रहे

सपनों और रात का मिलन हो कर रहे

जिस कदर जिस्म में धडकने धडकती रहे

सरगोशी से अपने होने का अहसास करती रहे

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------