दीप्ति मित्तल की रचना : मुसीबत हैं मेरे सपने

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दीप्ति मित्तल

मुसीबत हैं मेरे सपने, मुझे सोने नहीं देते,

मैं जो चाहती हूँ होना, मुझे होने नहीं देते।

 

पडे़ पीछे कुछ इस कदर, मैं जाऊँ चाहें जिधर,

वो मेरे साथ चल, तन्हाँ मुझे खोने नहीं देते।

 

मैं जब भी इंम्तिहानों में, हिम्मत हार जाती हूँ,

वो नाउम्मीद-नाकारा मुझे होने नहीं देते।

 

मैं बस दिमाग़ पर कर लूं, मगर दिल उनकी सुनता है,

बढ़ा कर हौसला दिल का, उसे रोने नहीं देते।

 

मैं अक्सर बीच राहों में रूक सुस्ताना चाहती हूँ,

मगर वो बीज सुस्ती के मुझे बोने नहीं देते।

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दीप्ति मित्तल

पुणे (महाराष्ट्रा)  

deeptimittal2@hotmail.com

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3 टिप्पणियाँ "दीप्ति मित्तल की रचना : मुसीबत हैं मेरे सपने"

  1. bahut hi acha laga apka sapna...bahut kuch apna salaga apka sapna...

    उत्तर देंहटाएं
  2. दीप्ति मित्तल2:03 pm

    शुक्रिया पूनम और बेला जी।

    उत्तर देंहटाएं

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