सोमवार, 26 मार्च 2012

अमरीक सिंह कंडा की लघुकथा - भगवान की मौत

कंडे दा कंडा
-अमरीक सिंह कंडा

भगवान की मौत
मैं अपनी बचपन की तस्वीरों वाली एलबम देख रहा था तो मेरी 7 वर्षीय पोती अपने पास आ गई और एलबम देखने लगी।


‘‘बड़े पापा, ये कौन हैं?’’
‘‘बेटा, ये मेरे मम्मी-डैडी हैं।’’
‘‘बड़े पापा, अपके मम्मी-डैडी कहां गए?’’
‘‘बेटे, वे भगवान के पास ऊपर चले गए।’’
‘‘बड़े पापा, वे भगवान के पास से कब वापस आएंगे?’’
‘‘यह देखो तुम्हापे मम्मी-डैडी की फोटो।’’ मैंने बात को टालते हुए कहा।
‘‘बड़े पापा, बड़े मम्मी कहां हैं?’’
‘‘बेटे, वह तो तेरे पैदा होने से एक वर्ष पहले ही भगवान के पास चले गए थे।’’ मैंने बड़ी मुश्किल से जवाब दिया।
‘‘बड़े पापा, सब लोग मर कर भगवान के पास चले जाते हैं?’’


‘‘हां बेटे, सब मर कर भगवान के पास चले जाते हैं।’’ मैंने एलबम बंद करते हुए कहा।
‘‘बड़े पापा इसका मतलब भगवान तो पहले से ही मरे हुए हैं।’’


... मुझे इसका जवाब नहीं सूझा और मैंने अपनी पोती को डांट कर भगा दिया।

8 blogger-facebook:

  1. ... और शायद इसीलिए भगवान की हर जगह पूजा पाठ स्तुति इत्यादि होती रहती है! :)
    धारदार व्यंग्य.

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  2. बालमन के प्रश्नों के उत्तर सबसे कठिन होते हैं, सुंदर लघुकथा.

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  3. अच्छी रचना है । प्रश्न खड़े करती है । बधाई ।

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  4. AAj samaz me aayakilogmarnese artharth bhagwanke
    pasjanese kyon dartehai//bhalamare ke pas koi kyo
    jayegaDadapotika vartalapekuttam sampreshanh vidha
    sadhuwad

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  5. बच्चों के मन हम से कहीं अधिक सत्य ,सरल और स्पष्ट होते हैं...

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  6. बहुत ही सुंदर कविता

    http://jagranmudda.jagranjunction.com/2012/03/26/water-is-essential-for-life/

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  7. answer logical hai. murdaghr main murda he hote hai to mare hoye log mare hoye ke paas he jate hai. ya to bhagwan bhi mrr gye ya fir na bhagwan marta hai or na he mare hoye log.

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