रविवार, 25 मार्च 2012

खलील जिब्रान की एक कविता

बच्चे खलील जिब्रान पुनीत बिसारिया 

अनुवाद - डॉ. पुनीत बिसारिया

आपके बच्चे वास्तव में आपके बच्चे नहीं हैं
वे स्वतः प्रवाहित जीवन में पुत्र और पुत्रियाँ हैं
वे आए हैं मगर आपसे होकर नहीं
आप उन पर अपना स्नेह तो थोप सकते हैं मगर विचार नहीं
क्योंकि वे स्वयं भी विचारवान हैं, विवेकशील हैं
आप उनकी देह को कैद कर सकते हैं, मगर आत्मा को नहीं
क्योंकि उनकी आत्मा आने वाले कल में विचरती है
जहाँ तक आप नहीं पहुँच सकते, सपने में भी नहीं .

आप उन जैसा बन्ने का प्रयास तो कर सकते हैं
लेकिन उन्हें अपने जैसा नहीं बना सकते .
क्योंकि समय कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता
न वह अतीत से रूककर दो बातें करता है .

आप वह धनुष हैं, जिस पर आपके बच्चे
तीर की भांति चढ़कर भविष्य की और जाते हैं
धनुर्धारी अनंत के पथ पर निशाना लगता है
और वह पूरी कोशिश करता है कि उसका तीर तेज़ी से
दूर और दूर और दूर तक जाये.

धनुर्धारी के हाथों में कसे हुए अपने धनुष को
खुशियों के लिए कसा रहने दो
उस समय भी जब वह तीर को उड़ते देख प्रसन्न हो .
क्योंकि वह उस धनुष को भी उतना ही प्यार करता है
जो हिले डुले बगैर उसके पास रहता है

(Dr. Puneet Bisaria) 

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------