गुरुवार, 8 मार्च 2012

मोहसिन खान की चुनावी ग़ज़ल

ग़ज़ल

वक़्त ने आज सबक़ सिखा दिया,

आवाम ने आईना दिखा दिया ।

 

ख़ूब रही ख़िलाफते-जंग दौराँ,

हमने पानी उनको पिला दिया ।

 

बंद आँखों से वादों पे किया यकीं,

सोचो तुमने क्या सिला दिया ।

 

तख़्त पर जो जमकर बैठे थे,

ख़ाक में उनको मिला दिया ।

 

हुक़ुमते ज़ुल्म को सहते रहे,

आज उनको मिटा दिया ।

 

ताक़त पर जिनको गुमान था,

पैर उनका ज़मीं से हिला दिया ।

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------