रविवार, 25 मार्च 2012

त्रिलोक सिंह ठकुरेला के हाइकु नवगीत

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हाइकु नवगीत

मेरा जीवन

 

मेरा जीवन

सुख - दुःख पूरित

अंक गणित।

 

और और की

सघन कामना में

जीवन बीता।

 

आखिर मिला

मुझे जीवन - घट

रीता ही रीता

 

किन्‍तु खड़ा था

बड़ा अकड़कर

मन - गर्वित।

 

मैंने समझा

मन - चौखट पर

सुख बरसा।

 

दुख ही मिला

अचानक मुझसे,

मन तरसा।

 

सब नाते थे

मतलब में रत ,

चंचल चित ।

 

 

खाली घट

 

रहा खोजता

मन अपनापन

जीवन भर।

 

मृग तृष्‍णा ने

मरु-भूमि में खोजे

सर, सागर।

 

जिधर गया

खाली ही घट था या

टूटी गागर।

 

मिले कुंज में

घात लगाये बैठे

कितने डर ।

 

कई बस्‍तियां

छान छान करके

इतना पाया।

 

उतर चुकी

सब के ही भीतर

भोगों की माया।

 

जोड़ तोड़ में

उलझे पाये सब

बस्‍ती के घर।

 

त्रिलोक सिंह ठकुरेला

(संक्षिप्‍त परिचय)

जन्‍म तिथि ः 01-10-1966

जन्‍म स्‍थान ः नगला मिश्रिया (हाथरस), उत्‍तर प्रदेश

पिता का नाम ः श्री खमानी सिंह

माता का नाम ः श्रीमती देवी

स्‍थायी पता ः ग्राम-नगला मिश्रिया, डाकघर-बसगोई,

जिला-महामायानगर(उत्‍तरप्रदेश)

साहित्‍य सृजन ः विभिन्‍न पत्र-पत्रिकाओं में, कविता, दोहे,

गीत, नवगीत, हाइकु, कुण्‍डलिया, बालगीत,

लघुकथा एवं कहानी प्रकाशित

प्रकाशित कृति ः नया सवेरा (बालगीत संग्रह)

प्रकाशक - राजस्‍थानी ग्रंथागार, जोधपुर

संकलन ः सृजन संगी, निर्झर, कारवां, फूल खिलते रहेंगे,

देशभक्‍ति की कविताएं (काव्‍य संकलन)

नवगीत ः नई दस्‍तकें (नवगीत संकलन)

हाइकु-2009 (हाइकु संकलन)

राजस्‍थान के लघुकथाकार, चमत्‍कारवाद,

देश विदेश की लघुकथाएं,

लघुकथा संसार ः मां के आस-पास

(लघुकथा संकलन)

जतन से ओढ़ी चदरिया (विशिष्‍ट संकलन)

भारतीय लघुकथा संसार (संदर्भ ग्रंथ)

सम्‍मान ः 1) आबू समाचार के दशाब्‍दि समारोह पर

राजस्‍थान के माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा

सम्‍मानित

2) हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मेलन प्रयाग द्वारा

वाग्‍विदांवर सम्‍मान

3) पंजाब कला साहित्‍य अकादमी, जालंधर

द्वारा विशेष अकादमी सम्‍मान,

4) विक्रमशिला हिन्‍दी विद्यापीठ भागलपुर

(बिहार) द्वारा विद्या वाचस्‍पति

संप्रति ः उत्‍तर पश्‍चिम रेलवे में इंजीनियर

सम्‍पर्क ः बंगला संख्‍या - एल - 99

रेलवे चिकित्‍सालय के सामने,

आबूरोड -307026 (राजस्‍थान)

मोबाईल ः 09460714267

ई-मेल % trilokthakurela@gmail.com

trilokthakurela@yahoo.com

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