शनिवार, 10 मार्च 2012

कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा का होली गीत

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होली गीत

बिना रंग लगाये मैं हो गया लाल

तेरी आंखों का है ये कमाल गोरी

फागुन मदमस्‍त हुआ, आया मधुमास रे

मन की अगन से ही, खिलता पलाश रे

भौंरों ने बदली है चाल गोरी...

तेरी आंखों का है ये कमाल गोरी

मौसम मधुशाला है, महुआ गिलास में

फूलों की खुशबू है, उजले लिबास में

होठों की लाली सम्‍भाल गोरी...

तेरी आंखों का है ये कमाल गोरी

तू मेरी मीरा है, तू ही तो राधा

जीवन भर मैंने तो, तुमको ही साधा

मैं ही हूँ तेरा नंदलाल गोरी...

तेरी आंखों का है ये कमाल गोरी

कृष्‍ण कुमार चन्‍द्रा

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(चित्र - मुखौटा कलाकृति - साभार नव सिद्धार्थ आर्ट ग्रुप)

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