बुधवार, 18 अप्रैल 2012

मोहसिन खान की 2 ग़ज़लें

image

ग़ज़ल

1

कोई बात अब याद नहीं आती ।

ज़िंदगी अब साथ नहीं आती ।

 

हम चलते, थकते रहे धूप-छाँव में,

कभी ख़ुशी की सौग़ात नहीं आती ।

 

हम दूर खड़े रहे उस गाँव में,

जहाँ कोई बारात नहीं आती ।

 

तुमने पूछा हो हाल मेरा किसी से,

नज़र मुझे ऐसी बात नहीं आती ।

 

क्यों करते हो नफ़रत मुझसे इतनी,

ख़ुदा की तरफ से ज़ात नहीं आती ।

 

तरसते हैं हर चमकती चीज़ की लिए,

ग़रीबों को अमीरी हाथ नहीं आती ।

 

बहोत सताया दर्दे हालत ने मुझको,

चैन से सोऊँ ऐसी रात नहीं आती ।

--

2

माना के मुल्क़ में बहोत हैं दुश्वारियाँ ।

फ़िर भी दिलों में हैं दिलदारियाँ ।

 

हर तरफ़ गोलियाँ हैं, ख़ौफ़े बारूद है,

फ़िर भी बचीं हैं फुलवारियाँ ।

 

ख़ुद मिट जाएगा एक दिन भ्रष्टाचार,

रूह में जब जागती हैं ईमानदारियाँ ।

 

ख़ुशी, हँसी, अमन छीन लिया तुमने,

ख़ौफ़ से भला मरतीं हैं किलकारियाँ,

 

सर्द, सियाह रात ढल जाएगी इक रोज़,

कुछ अभी भी बचीं हैं चिंगारियाँ ।

 

ओ ! अमरीका तेरा रुतबा होगा जग में,

कुछ हम भी रखते हैं ख़ुद्दारियाँ ।

2 blogger-facebook:

  1. बेनामी7:22 pm

    'khuda ki taraf se jaat nahi aati'.......bahut hi umda likha hai shayar ne...,
    Bhrshtachar ko mitane ki imandaar koshish...'khud hi mit jayega ek din bhrashtachar,ruh me jab jagti hai imandariya'...... ant me deshbhakti ka behad khuddar sher..... Accha likh rahe ho mohsin! Keep it up...
    -Dr.Dhirendra kerwal, ujn

    उत्तर देंहटाएं
  2. आप जैसे होंसला अफजाई करने वाले व्यक्तित्त्वों के कारण ही रचना की ऊर्जा मिल पाती है । सुंदर और सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिए धीरेन्द्र जी आपका धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------