सोमवार, 30 अप्रैल 2012

सुरेश कुमार 'सौरभ' के 21 हास्य दोहे

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1-
खर्चा यदि बचाने की, तुझे लगी है चाह।
करके नैना चार तू , करले प्रेम विवाह।।
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2-
मँहगाई डायन भई, बेरोजगारि चुड़ैल।
पैसा को नहिं समझिए, अब हाथों का मैल।।
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3-
हिन्दी भाषा हाय रे, घर की रही न घाट।
थूक गये अंग्रेज जो, इंग्लिश रहे हो चाट।।
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4-
अध्यापक की नौकरी, गईं ललायिन पाय।
लाला जी चौका करें, घर में शिशु खेलाय।।
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5-
नेता जी तो ठीक हैं, नहीं हैं उनमें खोट।
बुड़बक तो हम लोग हैं, दियें उनहिं को वोट।।
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6-
पिछली बातें भूलकर, आगे की अब सोच।
कुर्ता फाड़ न सर पटक, बालों को मत नोच।।
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7-
तेल भराने को नहीं, पाकिट में है धन।
हीरोहोंड-दहेज में , माँगने का तुझे मन।।
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8-
गइ भैंसिया पानी में, तो होत क्यूँ परसान।
दिन है बन्धू गर्मि का, करने दो असनान।।
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9-
मालुम नहीं क्यूँ उल्लु ही, कहे तुझे सब कोय।
सात बजे से पहिलेहि, तू तो जाता सोय।।
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10-
अब गुलजामुन बरफि से, खोया गया है खो।
'हलवाई' का नाम अब , 'मिलवाई' रख दो।।
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11-
लड़की लड़का बन रहीं, जिन्स टिशट को धार।
खूंटी पर लटका हुआ, रोये सुट सलवार।।
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12-
गलती अब जो करत है, वो कछु सजा न पाय।
आइ-लभ-यु तो मुँह कहे, गाल तमाचा खाय।।
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13-
शादी का मैं अभी तक, बना ना पाया मन।
क्योंकि हर इक लड़की को, मैंने समझा
बहन।।
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14-
जुग-जुग जीयें आप जी, ईश्वर से फरियाद।
जूता पालिश कीजिए, मेरा आशीर्वाद।।
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15-
जब-जब बक-बक तू करे , बोले फाल्तू बोल।
मच्छर मक्खी घुस पड़ें, तू जब मुँहवा खोल।।
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16-
बचपन का अब बाग तो, गया है आज उजड़।
चिकनी चमेलि देख के, छोटके रहें बिगड़।।
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17-
सोचो इंटर-नेट से , बढ़ेगा कैसे इल्म।
यू-ट्यूब पर छुप-छुपके, देख रहे हो फिल्म।।
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18-
वस्त्र बचाने की लगी, लड़किन में अब होड़।
छोटे-छोटे पहन रहीं, लम्बे कपड़े छोड़।।
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19-
जय हो बेरोजगारि माँ , काम नहीं फिर आज।
क्यों बैठे चुपचाप से, लाओ छीलें प्याज।।
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20-
मुर्गा भ्रष्टाचार का, बहुत दे चुका बांग।
खींचे अन्ना संग मिल, आओ इसकी टांग।।
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21-
प्रेम किसी से ना करो, बहुत बुरी है बात।
उल्लू तुम बन जावगे, जागोगे भर रात।।
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रचनाकार :- सुरेश कुमार 'सौरभ'
पता:- जमानिया कस्बा, जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
ई-मेल पता:- sureshkumarsaurabh@gmail.com

2 blogger-facebook:

  1. बेनामी1:48 pm

    हा हा हा हा हा हा हा हा

    उत्तर देंहटाएं
  2. ही ही ही हू हू हू खी खी खी

    उत्तर देंहटाएं

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