प्रवीण कुमार की कविता - किरणें प्रभात की

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किरणें प्रभात की

बडी दूर से

मँजिल तय

कर आई

किरणें प्रभात की

मेरे आंगन में

कलियों पल्लव पर

मुस्काती सी

स्वर्णिम किरणें

करती सृजन

नव नूतन का

धरती के स्वप्न

जाग रहे

धुंध छ्ट रही

रात की

स्वर्णिम किरणें

प्रभात की

-प्रवीण कुमार

प्रवीण कुमार
                                        पुत्र श्री रामशरण
                                       गाँव कन्होरा, जिला रेवाड़ी,
                                       हरियाणा, १२३०३५

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