रविवार, 22 अप्रैल 2012

विनय भारत की हास्‍य कविताएँ

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‘मत'
जब वो मांगने आये वोट
देके हाथ में बोले नोट
‘मत' देना हमको ही
वरना दे देंगे कोई चोट

 

‘लड़कियाँ'
एक को लाइन मारे
दूजे को सताय
तीजे को तड़फाय
चौथे को फसाय
पांचवे के साथ मंदिर जाके
छठे के साथ फेरे ले जाय
ऐसी ही होती है
लड़कियों की हैलो-हाय

 

‘कैरेक्‍टर ढ़ीला है'
भैंसे के साथ नेताजी की भैंस भागी
इसमें कौन बड़ी लीला है
नेताजी करे तो प्‍यार
भैंस करे तो उसका
कैरेक्‍टर ढीला है।


‘चारा'
नेताजी की भैंस का रंग
काले से पड़ गया हरा है
क्‍या भैंस ने भी
अब खाया
भ्रष्‍टाचार का चारा है?


‘फेसबुक'
लड़की-लड़की सब कहे
दीदी कहे ना कोय
जो लड़की सू दीदी कहे
वही ब्‍लैक लिस्‍ट होय।

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