मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - दोस्ती

image

दोस्ती

श्याम ने मोहित से पूछा आजकल रोहित क्यों नहीं दिखाई पड़ता ? पहले कोई दिन मुश्किल से खाली जाता था जब मैं यहाँ आऊँ और वह न मिले। मोहित बोला अब हमारी और रोहित की उतनी नहीं जमती। श्याम बोला आखिर हुआ क्या ? मुझे अब भी याद है कि कहीं आना-जाना हो तो तुम दोनों अक्सर साथ जाते थे। अक्सर रोहित तुम्हारे यहाँ खाना खाता था। कुछ भी बना हो तुरंत खुद निकालकर खाने लगता था।

मोहित बोला यह सब तो ठीक है। दोस्ती में यह सब तो चलता ही है। वह खुद आता था और कभी-कभी हमारे अन्य दोस्तों को भी ले आता था। सब लोग समझते थे कि हम दोनों एक अच्छे दोस्त हैं। और मैं भी ऐसा ही सोचता था। लेकिन एक दिन मेरा यह भ्रम टूट गया। एक दिन मैं जीटीपीजी कॉलेज गया था। वहीं उससे भी मुलाकात हो गई। लेकिन उसने एक बार भी मुझे घर चलने के लिए नहीं कहा। जबकि उसका घर कॉलेज के पास ही है।

कुछ दिन बाद मैं फिर कॉलेज गया। लौटते समय मैंने सोचा कि चलो रोहित के घर होकर चलते हैं। मैंने कॉलबेल बजाई। उसका नौकर आया। मैंने पूछा क्या रोहित घर पे है। उसने कहा अभी बुलाता हूँ। रोहित आया और वहीं गेट के बाहर बातचीत करता रहा। हम चले आये। तब मैंने सोचा कि सुमित सच ही तो कह रहा था कि रोहित कहता है कि हमारी दोस्ती गेट के बाहर तक है। अब तुम्हीं बताओ यह भी कोई दोस्ती है ?

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

*********

1 blogger-facebook:

  1. bahut achchi prabhaav sheel kahani hai jo jeevan ki ek sachchaai ko bakhoobi bayaan karti hai ki dosti dekhbhaal kar karo har chamakne vali cheej sona nahi hoti.

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------