मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

मीनाक्षी भालेराव की कविता - मैं महकना चाहती हूं...

मैं चाहती हूँ
 
महकना चाहती हूँ ,
अधखिली कलियों सा !
रोशनी सूरज की ओढ़ ,
हवाओं की पायल पहन !
इठलाना चाहती हूँ !
मोरनी बन कर ,
***************************
एक गजल लिखना चाहती हूँ ,
ख़ामोशी के तराने पर !
मौसम की नरमी सा ,
बादलों की धुन पर !
नाचती बिजली के पांवों पर ,
इंद्रधनुषी रंगों पर !
***************************
संगीत बनाना चाहती हूँ ,
गिरती बूंदों का !
बजना चाहती हूँ,
मन्दिर की घंटियों सा !
पूजा के शंख सा ,
काना की बांसुरी सा !
*****************************
एक इबारत लिखनी है ,
फूलों की पाखंडियों पर !
ओस की झिलमिल पर,
झांकती किरणों पर !
सुबह की लाली पर ,
इठलाती धूप पर !
****************************
 
बाकी है
इश्क कर ले के जवानी, अभी बाकी है ,
तेरे चेहरे की रवानी, अभी बाकी है !
पल खो जायेगें, के पलक झपकते ही ,
के वक्त की रफ्तार, अभी बाकी है !
क्यों गुजारता है, अकेले जिन्दगी को ,
के हम सफर का साथ, अभी बाकी है !
ढूंढता फिरता है राहें, क्यों इधर-उधर ,
चल तलाश ले के मंजिल, अभी बाकी है !
चाहे कब्र में पांव, लटके हो मुसाफिर ,
के पर अभी  भी रुखसत, होना बाकी है !
मरते दम तक साथ उम्मीद, का ना छूटे ,
के अभी भी उनका जवाब, आना बाकी है
 
दुश्मनी
यूँ बाँटती फिरी मैं गुलदस्ता हर एक को  ,
मेरी बारी आई, तो कांटे बिछा दिए !
घर सजाया हर-एक का रंग-ऐ-गुल से ,
उन्हीं ने मेरे घर पर कीचड़ उछाल दिया !
थे कठिन रास्ते दोस्तों की मंजिल के ,
अपनी राहें दे उनको मंजिल तक पहुंच  दिया !
जब मैं चली अपनी राहें-ऐ-मंजिल ,
तो पत्थर हर और मेरी राहों में बिछा दिए !
ता उम्र साथ निभाती चली में जिन दोस्तों का ,
उन को पल ना लगे दुश्मन बन दिल दुखाने में !
 
किस्मत
उम्मीदों को बांधे रखेगी ,
तुम्हारी मेहनत की डोरी !
जलाये रखो जित की ज्वाला ,
ह्रदय में पल रही महात्वाकांक्षा को !
धैर्य की चिंगारी से जलाये रखना
अपने कदमों को बांध लो ,
सपनों के धरातल पर मजबूती से ,
हाथों को हथियार बनाकर !
खोद लो तकदीर की जमीन को ,
चाहे बंध पड़ा हो जंग लगे ताले से !
दृढ़ निश्चय की चाबी खोल देगी ,
बरसों से बंद पड़ी किस्मत का ताला !
उठो अपनी तकदीर से लड़ने को ,
जंग का एलान कर,आगाज कर दो !

2 blogger-facebook:

  1. एक गजल लिखना चाहती हूँ ,
    ख़ामोशी के तराने पर !
    मौसम की नरमी सा ,
    बादलों की धुन पर !
    नाचती बिजली के पांवों पर ,
    इंद्रधनुषी रंगों पर ! wow.... bhaut hi khubsurat rachna....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. meenakshibhalerao8:57 am

      suhma ji bhut bhut dhnvad aap ne meri hosla afjai ki
      aage bhi aap sbhi ki ummido pr khri utrna chahti hun
      is ke liy aap sbhi ki prtikriya ka intjar rhega

      हटाएं

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