शनिवार, 14 अप्रैल 2012

सुरेश कुमार 'सौरभ' की कविता - सबका मालिक एक

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अल्लाह कोई, कोई वाहे गुरू,कोई गौड, कोई ईश्वर कहता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

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अल्लाह को गाली दोगे तो, अपने आराध्य को दोगे तुम

भगवान को गाली दोगे तो, अपने आराध्य को दोगे तुम

वाहे गुरू गौड हैं दो तो नहीं, बस एक ही कर्ता-धर्ता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

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मन्दिर मस्जिद का झगड़ा तो, मालिक को भी मंज़ूर नहीं

पर इंसानों को दोष क्यों दें, ये मूर्ख हैं इनका क़सूर नहीं

वो जानवरों की टोली भली, जो ये सब काम न करता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

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मज़हब की खाई ने अक्सर, दो इंसानों को दूर किया

इस पापी भेद-भाव ने भी, कट्टर मानव को ज़रूर किया

न जाने दिल के बाग़ से क्यों, ईर्ष्या का फूल न झड़ता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

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वो बाइबिल के ज्ञाता और वो, गुरुग्रन्थ

साहिब के ज्ञानी हैं

इनको कुरान तथा इनको, रामायण याद ज़ुबानी है

बस प्रेम के अक्षर याद नहीं, ये बात ही 'सौरभ' खलता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

अल्लाह कोई, कोई वाहे गुरू,कोई गौड, कोई ईश्वर कहता है।

सबका मालिक तो एक ही है, आपस में क्यों इंसाँ लड़ता है।।

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रचनाकार :- सुरेश कुमार 'सौरभ'

पता :- वार्ड नं. 24, मोहल्ला- बुद्धिपुर/ पठान टोली, जमानिया कस्बा,

जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

e-mail :- sureshkumarsaurabh@gmail.com

5 blogger-facebook:

  1. Jayesh Patel6:17 am

    सुरेश जी बहुत ही अछि रचना है....कहाँ से ये सब स्फुरना हो जाती है आपको? मान गए जनाब....

    उत्तर देंहटाएं
  2. तोताराम4:26 pm

    बहुत प्रासंगिक रचना... आपके हुनर को सलाम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुन्दर रचना रची है ! मेरी ओर से आपको हार्दिक शुभकामनाएं |

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर रचना रची है |

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेनामी1:44 pm

    सुरेश जी मेरी भी उपस्थिति दर्ज कर लीजिए और साथ में यह भी की बहुत अच्छा!
    i am........
    random

    उत्तर देंहटाएं

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