शंकर लाल कुमावत की हास्य कविता - ओम जय सत्ता देवी

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

ओम् जय सत्ता देवी

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी

जो जन तुमको ध्याव

सुख सम्पति पावे

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

तू जो रुष्ट हो जावे

सब कुछ लुट जावे

मैया सब कुछ लुट जावे

मैया सब कुछ लुट जावे

राजपाट सब छुटे

राजा भी जेल पावे

मैया राजा भी जेल पावे

तू जो ‘मुलायम’ होवे

कैदी भी मंत्री हो जावे

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

जो तेरी शरण में आवे

उसके मद के आगे

कोई नहीं टिक पावे

ओ मैया कोई नहीं टिक पावे

नियम कायदे भागे

रेल भी अपना पथ छोड़े

जब उसके घोड़े दोड़े

ओ मैया जब उसके घोड़े दोड़े

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

जो तू विसरावे

अमर माया मिट जावे

ना कोई हाथ मिलावे

अपने भी लट बजावे

राजा भी जेल जावे

ओ मैया राजा भी जेल जावे

ओ मैया राजा भी जेल जावे

ओम् जय सत्ता देवी |

जय हो सत्ता मैया जय

---

 

जीवन क्या है ?

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जब तक है ये खेला

तब तक है सुख दुःख का मेला

जिसके पीछे चलता है जगत का रेला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला |

जिस दिन खत्म हुआ ये खेला

जाना पड़ता है सब छोड़ कर अकेला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जब सब छोड़ कर जाना ही है अकेला

तो फिर काहे को करे

मीत मेरे इस मन को मैला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जो खेले खेल भाव से

तो पावन हो संध्या वेला

नहीं तो है ये विष का थैला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला |

 

शंकर लाल, इंदौर मध्यप्रदेश

18.04.2012

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "शंकर लाल कुमावत की हास्य कविता - ओम जय सत्ता देवी"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.