रविवार, 6 मई 2012

शंकर लाल कुमावत की हास्य कविता - ओम जय सत्ता देवी

ओम् जय सत्ता देवी

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी

जो जन तुमको ध्याव

सुख सम्पति पावे

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

तू जो रुष्ट हो जावे

सब कुछ लुट जावे

मैया सब कुछ लुट जावे

मैया सब कुछ लुट जावे

राजपाट सब छुटे

राजा भी जेल पावे

मैया राजा भी जेल पावे

तू जो ‘मुलायम’ होवे

कैदी भी मंत्री हो जावे

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

जो तेरी शरण में आवे

उसके मद के आगे

कोई नहीं टिक पावे

ओ मैया कोई नहीं टिक पावे

नियम कायदे भागे

रेल भी अपना पथ छोड़े

जब उसके घोड़े दोड़े

ओ मैया जब उसके घोड़े दोड़े

ओम् जय सत्ता देवी

मैया जय सत्ता देवी |

 

जो तू विसरावे

अमर माया मिट जावे

ना कोई हाथ मिलावे

अपने भी लट बजावे

राजा भी जेल जावे

ओ मैया राजा भी जेल जावे

ओ मैया राजा भी जेल जावे

ओम् जय सत्ता देवी |

जय हो सत्ता मैया जय

---

 

जीवन क्या है ?

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जब तक है ये खेला

तब तक है सुख दुःख का मेला

जिसके पीछे चलता है जगत का रेला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला |

जिस दिन खत्म हुआ ये खेला

जाना पड़ता है सब छोड़ कर अकेला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जब सब छोड़ कर जाना ही है अकेला

तो फिर काहे को करे

मीत मेरे इस मन को मैला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला

जो खेले खेल भाव से

तो पावन हो संध्या वेला

नहीं तो है ये विष का थैला

जीवन क्या है ?

जीवन तो है बस एक खेला |

 

शंकर लाल, इंदौर मध्यप्रदेश

18.04.2012

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------