एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - पशु-पक्षियों की महानता

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पशु-पक्षियों की महानता

(१)

जानवर से बोला इंसान ।

सबसे ज्यादा मनुज महान ।।

हम सबकी है बाँकी शान ।

कुल में भी बहु हुए महान ।।

(२)

जानवर बोला दीजे ध्यान ।

हम भी भारत की संतान ।।

मेरे भी कुल बहुत महान ।

हुए, नहीं क्या तुमको ज्ञान ।।

(३)

फिर भी करते नहीं बखान ।

क्योंकि अच्छा नहीं गुमान ।।

पहले वालों की थी शान ।

होना चहिये तुमको भान ।।

(४)

जटायु, सम्पाती गीध महान ।।

होता है उनका गुनगान ।।

अरुण-गरुण को भी लो जान ।

संग चलते दिनकर-भगवान ।।

(५)

कागराज का कितना नाम ।

जपते रहते हैं जो राम ।।

बानर-भालू प्रभु के साथ ।

लंका विजय बटाए हाथ ।।

(६)

नंदी बैल का देखो मान ।

कामधेनु है गाय महान ।।

शिवा-शेर अतिसय बलवान ।

गणपति-चूहा महिमावान ।।

(७)

लक्ष्मी के उल्लू का मान ।

सरस्वती का हंस सुजान ।।

ऐरावत हाथी की शान ।

उच्चैश्रवा अश्व महान ।।

(८)

कहाँ लग करते रहें बखान ।

भैया जी लो इतना मान ।

देवी देवता अरु भगवान ।

संग चलते पशु नहि इंसान ।।

(९)

पशु, पक्षी का छोटा नाम ।

जबकि आते सबके काम ।।

पालो तो बन रहें गुलाम ।

दुःख सहकर देते आराम ।।

(१०)

पशु नहि होते नमकहराम ।

मानव जाने अपना काम ।।

सोच के देखो तुम्ही महान ।

पशु-पक्षी अथवा इंसान ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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