मंगलवार, 8 मई 2012

एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - पशु-पक्षियों की महानता

image

पशु-पक्षियों की महानता

(१)

जानवर से बोला इंसान ।

सबसे ज्यादा मनुज महान ।।

हम सबकी है बाँकी शान ।

कुल में भी बहु हुए महान ।।

(२)

जानवर बोला दीजे ध्यान ।

हम भी भारत की संतान ।।

मेरे भी कुल बहुत महान ।

हुए, नहीं क्या तुमको ज्ञान ।।

(३)

फिर भी करते नहीं बखान ।

क्योंकि अच्छा नहीं गुमान ।।

पहले वालों की थी शान ।

होना चहिये तुमको भान ।।

(४)

जटायु, सम्पाती गीध महान ।।

होता है उनका गुनगान ।।

अरुण-गरुण को भी लो जान ।

संग चलते दिनकर-भगवान ।।

(५)

कागराज का कितना नाम ।

जपते रहते हैं जो राम ।।

बानर-भालू प्रभु के साथ ।

लंका विजय बटाए हाथ ।।

(६)

नंदी बैल का देखो मान ।

कामधेनु है गाय महान ।।

शिवा-शेर अतिसय बलवान ।

गणपति-चूहा महिमावान ।।

(७)

लक्ष्मी के उल्लू का मान ।

सरस्वती का हंस सुजान ।।

ऐरावत हाथी की शान ।

उच्चैश्रवा अश्व महान ।।

(८)

कहाँ लग करते रहें बखान ।

भैया जी लो इतना मान ।

देवी देवता अरु भगवान ।

संग चलते पशु नहि इंसान ।।

(९)

पशु, पक्षी का छोटा नाम ।

जबकि आते सबके काम ।।

पालो तो बन रहें गुलाम ।

दुःख सहकर देते आराम ।।

(१०)

पशु नहि होते नमकहराम ।

मानव जाने अपना काम ।।

सोच के देखो तुम्ही महान ।

पशु-पक्षी अथवा इंसान ।।

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

*********

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------