मंगलवार, 15 मई 2012

विष्णु बैरागी की कहानियों का जीवंत वीडियोकास्ट

नीचे दिए गए वीडियो में देखें विष्णु बैरागी की मार्मिक कहानी - मित्रधन. इस कहानी में वे अपनी आप-बीती बता रहे हैं खास अपनी शैली में कि कैसे उन्होंने अपना मकान मित्रों के सहयोग से बनवाया.

 

नीचे दिए गए वीडियो में विष्णु बैरागी एक कहानी बता रहे हैं - बाइज्जत बरी. यह कहानी उनके ज्येष्ठ भ्राता बालकवि बैरागी की लिखी हुई है.

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  1. रविजी, खुद को बोलते हुए देख रहा हूँ। रोमांचित हूँ। फूलों से दोस्‍ती करने का यही लाभ होता है - धाग भी देवताओं के कण्‍ठ तक पहुँचा जाता है। मैं वही धागा हूँ। आपको प्रणाम करता हूँ। मन भीगा हुआ है।

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  2. विष्णु जी, इस विष-वृक्ष रूपी संसार में , अमृत के दो ही फल लगे हैं , एक है साहित्य रस का पान और दूसरा, सज्जनों की संगति, आपको दोनों उपलब्ध हुआ, बधाई ।
    " संसार विष वृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे ।
    काव्यामृत रसास्वादन संगतिः सज्जनैः सह ।"

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