शुक्रवार, 18 मई 2012

सविता श्रीवास्तव की बुन्देली कहानी - राजा के बड़े बड़े कान


क राज को राजा भौतै नोनों हतो,दयावान गुनी न्यायप्रिय। रैयत सोई ऊखों खूब चाहतती काये कें ऊ सबको भलो करत्तो। सारे राज्य में अमन चैन हतो। पे एक बात तनक गड़्बड़ हती के ऊ राजा के कान भौत बड़े बड़े हते। ऊ अपने कान बड़ी भारी पगड़ी में लुकायें रेत तो। जा बात कोऊखों ने पता हती। रानी तक ने जानती,हां राजा को जोन नाऊ हतो ऊ भर जानततो काये कें ऊ त ो राजा के बार बनाउततो,और ऊसें जा बात राजा छिपा सोई ने सकत तो। पे भईया राजा ने ऊखों शुद्ध बुंदेली में समझा दओ तो के जा बात कोऊखों पता ने लगे नईं तो तुमें हम फाँसी पे टांग देहें। नाऊ कायेखों कोऊ से कतो फाँसी थोड़ी चड़ने हती। मईना पंदरा दिन ऊ आउततो और बार बनाके चलो जात तो। कोऊ खों पता ने हती के ऊके कान खूब बड़े हैं। सब कछू मजा में चल रओ तो। पे भैया होनी खों को टार सकत एक बेर नाऊ बीमार हो गओ,और ऐसो बीमार भओ के दो मईना बिस्तरई सें ने ऊठो। अब राजा का करे, बार इत्ते बड़े हो गये के ऊखों अकबकाई लगन लगी,मूड़ बसान लगी


आखिरकारा ऊनें दूसरे नाई खों खबर करी के राजनाऊ बीमार है सो राजमहल में आकें बारा बना जाओ। ई नये नाऊ को नाम गुपले हतो। ऊखों सबरे इज्जत सें गुपले जी केतते। जब गुपले ने राजा को बुलौआ सुनो सो खूब खुस हो गओ। अपनी पेटी उस्तरा लेकें राज महल में पोंच गओ। राजा बार बनवाबे के लाने अपनी पगड़ी उतारी सो उनके कान देखकें गुपले डरा गओ,हे भगवान इत्ते बड़े कन हाथी के कानों घाईं।
राजा ने ऊसें कई" देखो गुपले हमाये काना इते बड़े हैं जा बात कोऊखों नईं पता तुम सोई कोऊसें ने कईओ। और यदि कोऊ सें कई और हमें पता लग गओ या रैयत खों पता लग गओ तो तुमें फांसी पे टाँग देहें। "


"हज़ूर हम कायेखों कौनऊं से केहें का हमें मरने हैं?"नाऊ ने डरात कई। जैसे तैसें ऊनें बार बनाये और पेटी लेकें भगो के पछारूं मुरक कें लो नईं देखो। घरे आकें साँस मेंसाँस आई कऊं ई बात को हल्ला हो गओ के राजा के कान बड़े बड़े हैं तो राजा तो जोई समझ के गुपले नेई हल्ला करो हुईये। रोटी खा पीकें ऊ आराम करन लगो। पे परें परें ऊको एकदम सें पेट पिरान लगो। जो का भओ...?उखों तबई खबर आई के ऊखों जा बड़ी खराब बीमारी है के कौनौउं गुप्त बात ऊके पेट पचत नईंयां। ये दैया अब का करे,राजा के कानों बारी बात कोऊ सें के भी नईं सकत। केत हैं तो राजा फाँसी पे टंगवा देहे और ने केहें तो पेट में दर्द सें ऊंसई मर जेहें। ऊ तो पगला गओ। जैसें तैसें रात भई ऊने सोबे की कोसिस करी<पे कायखों पेट इत्ती जोर सें पिरानो के ल्गो के अब प्रान निकरतई हैं। ऊ दौड़ा लगा के घर के बायरे लगे एक पेड़ की लिंगां पोंचो और ऊके कान में धीरे सें के दई राजा के कान बड़े बड़े हैं। चुगली हो गई सो ऊको पेट पिराबो मिट गओ। ऊने सोची के पेड़ कौन बोलत आहे सो कौन से केहे। सांप भी मर गओ और ळाठी सोई नईं टूटी। ऊ तो जाकें मजे सें सो गओ।


पे भगवान की मर्जीकछु दिनों बाद ऊ पेड़ कटो सो ऊकी लकड़िया सें तबला और सारंगी बने। जैसो नियम हतो दोई बाजे पैली बेर राजा के दरबार मॆं बजबे गये। दरबार खचाखच भरो हतो काये सें के नये बाजन को सबईजने मजा लिओ चाहतते।
जैसेईं तबलची ने तबला पे हाथ ठोको सो आवाज आई"राजा के बड़े बड़े कान,राजा के बड़े बड़े कान"


सारंगीबाज सारंगी के तार छेड़े तो आवाज आई "तुमसे किसने कहा तुमसे किसने कहा"
"गुपले नाई ने कहा गुपले नाई ने कहा"तबला फिर चीखा।
दरबार में सन्नाटा छा गया ये क्या हो रहा दरबारी कानाफूसी करने लगे।
तबला हर बार यही चीख रहा था।


राजा गुस्से से पागल हो गओ"बुलाओ गुपले नाई को।
गुपले डरात डरात आओ और राजा के पैरों पेगिर परो"हुज़ूर गलती माफ हो मैंने ऐसो जानबूझ कें नईं करो मोखों जा बीमारी है के कौनौउं बात गुप्त रखत हैं हुज़ूर तो मोरो पेट पिरात सो मैंने एक पेड़ के कान में जा बात के दई ती के राजा के कान बड़े बड़े हैं। माई बाप हमें का पता ती के पेड़ सोई बोलत। "
अब तो सबखों पता हो गई ती के राजा के कान खूब बड़े हैं।


राजा ने सोई गुपले खों माफ कर दओ।
कथा को सार जो भओ के कौनऊं बात अपने से दूसरे के गई बा गोपनीय नईं रे पाऊत।

--

सविता श्रीवास्तव, छिन्दवाड़ा

2 blogger-facebook:

  1. बेनामी1:49 pm

    bahut badhiya,,,,majedar aour shikshaprad kahani hai..

    उत्तर देंहटाएं
  2. savita ji ki kahani achchi lagi usase badhkar yah Bundeli me savita ji ko sadhuvad Bundeli Smarika 2012 ka me sampadan kar raho hoo chahe to mere mail id per koi kahani bundeli me bheje swagat he mera mail id he mahendrabhishma@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं

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