यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - आई पी एल का तमाशा

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आई․ पी․ एल․ का तमाशा

तमाशा शुरु हो गया है। चार हजार करोड़ रुपये तो केवल टीवी प्रसारण से मिलेंगे। भ्रष्टाचार के तयशुदा मानकों के अनुसार लगभग बीस प्रतिशित राशि अफसरों की जेब में जायेगी। फिर जांचें होगी, कुछ छुट भैय्‌ये फंसेगें और खेल चलता रहेगा। अमिताभ बच्‍चन फिर प्रसून जोशी की कविता पढ़ेगें और शो जारी है कि आवाज आती रहेगी। कौन कहता है हमारे खिलाड़ी थक गये हैं। वे तो आई․ पी․ एल․ के लिए टेस्‍टमैचों व एक दिवसीय मैचों में विश्राम कर रहे थे, अब वे बिलकुल तरो ताजा है, पैसा दो रन लो। काश सचिन तेन्‍दुलकर एक ऐसा शतक भी लगाता जिससे भारत जीत जाता। मगर आम आदमी की कौन सुनता है। उन्‍हें तो तेल, साबुन, कोल्‍डडिक, क्रीम बेचने से ही फुरसत नहीं है। बचे हुए समय में वे अपने पैसों को और ज्‍यादा बढाने के लिए सी․ए․सी․एस․ कर सलाहकारों से बात-चीत में व्‍यस्‍त रहते हैं। राहुल द्रविड़ की विदाई पार्टी फीकी रहती है मगर मुकेश अम्‍बानी की पार्टी के चर्चे महीनों होते रहेंगे। वहाँ सब एक प्रभामण्‍डल वाले नव धनाठ्‌य वर्ग के लोग होते हैं।

कामनवेल्‍थ के घोटालों से निपट कर जाचं एजेन्‍सीय आई․पी․एल․ की और ध्‍यान देगी, वैसे भी आई․पी․एल․ के तथाकथित जनक लन्‍दन में दिवालिए घोषित हो गये हैं। वैसे भी वे आई․पी․एल․ को विदेश ले जाने जैसा जघन्‍य अपराध कर चुके हैं।

आई․पी․एल․ यदि खेल है तो उसे खेल भावना से खेला जाना चाहिये पैसे की भावना से नहीं। शुद्ध मनोरंजन से खेलें। राजनीति से नहीं। वैसे भी खिलाडि़यों को चौकटी से नीलामी में खरीदा और बेचा जा रहा है पूरी की पूरी टीम या कम्‍पनी खरीदी और बेची जा रही है। मध्‍ययुग में गुलामों और औरतों की खरीद-फरोख्‍त होती थी आज कल खिलाडि़यों की हो रही है। चीयर बालाओं के क्‍या कहने। वे सब मिल कर अश्‍लीलता की एक नई परिभाषा गढ़ रही है। वैसे मेरा अन्‍तिम सुझाव तो ये है कि एक आई․पी․एल․ बिकिनी-धारी महिला खिलाडि़यों का भी शुरु किया जाये। पैसा नहीं सोना चांदी हीरे मोती बरसेगें। खुदा खैर करे।

यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

․․09414461207

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2 टिप्पणियाँ "यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - आई पी एल का तमाशा"

  1. बेनामी9:43 am

    आपके विचार बहुत ठीक हैँ।
    गावोँ मेँ जैसे गाय-भैँसे खरीदी बेची जाती हैँ ठीक उसी प्रकार खिलाड़ियोँ को खरीदा जाता है।
    सब काले धन की महिमा है।
    - रवि प्रकाश यादव

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  2. आपके विचार बहुत ठीक हैँ।
    गावोँ मेँ जैसे गाय-भैँसे खरीदी बेची जाती हैँ ठीक उसी प्रकार खिलाड़ियोँ को खरीदा जाता है।
    सब काले धन की महिमा है।
    - रवि प्रकाश यादव

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