मोनिका की कविता - पानी है अनमोल

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

पानी है अनमोल

clip_image002

मोनिका

अनुसन्‍धान कर्ता

वनस्‍थली विधापीठ (राजस्‍थान)

पानी तो अनमोल है clip_image004
उसको बचा के रखिये
बर्बाद मत कीजिये इसे
जीने का सलीका सीखिए

पानी को तरसते हैं
धरती पे काफी लोग यहाँ
पानी ही तो दौलत है
पानी सा धन भला कहां

पानी की है मात्रा सीमित
पीने का पानी और सीमित
तो पानी को बचाइए
इसी में है समृद्धि निहित

शेविंग या कार की धुलाई
या जब करते हो स्नान
पानी की जरूर बचत करें
पानी से है धरती महान

जल ही तो जीवन है

पानी है गुणों की खान

पानी ही तो सब कुछ है

पानी है धरती की शान

 

पर्यावरण को न बचाया गया

तो वो दिन जल्दी ही आएगा

जब धरती पे हर इंसान

बस ‘पानी पानी’ चिल्लाएगा

 

रुपये पैसे धन दौलत

कुछ भी काम न आएगा

यदि इंसान इसी तरह

धरती को नोच के खाएगा

 

आने वाली पुश्तों का

कुछ तो हम करें ख़्याल

पानी के बगैर भविष्य

भला कैसे होगा खुशहाल

 

बच्चे, बूढे और जवान

पानी बचाएँ बने महान

अब तो जाग जाओ इंसान

पानी में बसते हैं प्राण

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "मोनिका की कविता - पानी है अनमोल"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.