रविवार, 13 मई 2012

श्याम गुप्त की कहानी.....माँ.....

image

ईश्वर ने जब माँ को बनाया तो समीप खड़े हुए देवदूत ने अभिभूत होकर कहा, ’प्रभु ! यह तो जगत की सर्वोत्कृष्ट, सर्वश्रेष्ठ, सर्वसौन्दर्यमय, सर्वगुणसम्पन्न एवं स्वयं विशिष्टता व गुणों का अवतार है। अब तो आप निश्चिन्त होंगे कि यह कायनात निश्चय ही सदा दैवीय गुणों से परिपूर्ण रहेगी।

ईश्वर ने कहा, ‘ हाँ आशा तो यही है|’ ईश्वर के ललाट पर कुछ चिंता की सलवटें भी थीं।

वार्तालाप शैतान व उसका दूत भी सुन रहा था। शैतान चिंतित होते हुए दूत से बोला ,’ स्थिति पर ठीक से दृष्टि रखो|’

वर्षों बीत गए। स्त्री-पुरुष सदाचरण-युक्त जीवन व्यतीत कर रहे थे| बच्चे माँ के पयामृत-पान से धीर, वीर, गंभीर, ज्ञानवान, आचारवान, आस्थावान व बड़ों के आज्ञाकारी, कोमलमना होते थे| सर्वत्र धर्म, न्याय, सत्य का चलन था एवं सुख-शान्ति थी। स्त्री-पुरुष लिंगानुपात-बिदु अर्थात स्त्री/पुरुष = १ ही रहता था|

शैतान यह सब देखकर बहुत अप्रसन्न हुआ| उसने दूत को बुलाकर डांटा,’ यह क्या हो रहा है? इस प्रकार तो हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जायागा। जाओ , शीघ्र ही स्थिति को सुधारों वर्ना किसी और को पृथ्वी का प्रधानमंत्री बनाने का मन बना लूँगा और तुम्हें रौरव-नर्क का राज्यपाल बना दिया जायगा|

कुछ वर्षों बाद दूत राजधानी आयाऔर प्रसन्नता पूर्वक शैतान को निरीक्षण का आमंत्रण दिया|

शैतान ने देखा कि सर्वत्र पृथ्वी पर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी हुई हैं। बड़े-बड़े मॉल हैं। सर्वत्र मशीनों से काम हो रहा है। इंसान आसमान में उड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान जाता है| मानव-कृत झीलों में नहाता है| स्वयं अपने हाथ से कोई काम नहीं करता बस खूब धन कमाता है व ऐश करता है। मौज-मस्ती में लिप्त है। परन्तु चारों और अशांति है, द्वंद्व-द्वेष में जकडा हुआ है| धन के लिए चोरी, लूट, झगड़ा, ह्त्या, डकैती की गलाकाट प्रतियोगिता है| भ्रष्टाचार, अनाचार, स्त्रियों से दुर्व्यवहार, मारपीट, बलात्कार की बाढ़ आई हुई है|

वाह! बहुत खूब। परन्तु यह सब क्यों होने लगा ? शैतान ने खुश होकर पूछा। दूत मुस्कुराते हुए शैतान को विशेष-निरीक्षण ...साईट-इन्सपेक्शन पर ले गया। शैतान देखने लगा....

एक घर में बेटे ने बूढ़े माँ-बाप को घर से निकाल दिया था। वे किसी भी तरह दर-दर की ठोकरें खाते हुए अपना गुजारा कर रहे थे।

एक बेटे ने अपने माँ-बाप को ओल्ड-एज होम में भारती कर दिया था व मैनेजर प्रतिवर्ष जन्म-दिवस आदि पर बेटे की और से उन्हें भेंट भिजवा दिया करता था।

एक देश में माँ व बेटा साथ-साथ अपने-अपने गर्ल-फ्रेंड व बॉय-फ्रेंड के साथ सार्वजनिक स्थान पर बिकनी में स्नान कर रहे थे।

जगह-जगह युवाओं को धर्म, विज्ञान, शास्त्र , साहित्य की बजाय – मैनेजमेंट कैसे करें व खूब धन कैसे कमाएँ के प्रवचन दिए जा रहे थे।

एक स्थान पर बेटा, बेटी व माँ-बाप बैठ कर टी वी पर शीला की जवानी गाना सुन रहे थे।

कहीं - कहीं यह रिवाज़ था कि पति-पत्नी कन्या-भ्रूण को जन्म से पहले ही गर्भपात करवा देते थे, जिसे एवोर्शन कहा जाता था। स्त्री-पुरुष, युवक-युवती साथ-साथ तो रहते थे बिना विवाह के परन्तु संतान कौन पालेगा व केरियर के नाम पर गर्भपात करा रहे थे। स्त्री-पुरुष का लिंगानुपात -बिंदु भी एक से काफी नीचे चला गया था।

शैतान ने कुछ समाचार-पत्रों में समाचारों का भी अवलोकन किया......

--- एक देश के राष्ट्रपति ने पुरुष-पुरुष विवाह, स्त्री-स्त्री विवाह को जायज़ बताया ।

---बेटे ने पत्नी के कहने पर माँ की ह्त्या की।

-- तीन बच्चों की माँ द्वारा प्रेमी के साथ मिलकर तीन बच्चों व पति की ह्त्या।

---पति द्वारा उत्प्रीणन से तंग आकार माँ ने बच्चों की ह्त्या के बाद आत्महत्या करली।

शैतान ने दूत की पीठ ठोंकी और पूछ ,’ यह सब तुमने कैसे किया ?’

दूत ने बताया –---मैंने सिर्फ स्त्रियों को पुरुषों की बराबरी हेतु, धन कमाने, फैशन व फिगर की चिंता-चर्चा में लगा दिया, साथ ही डिब्बे के दूध का आविष्कार कराया तथा युवाओं -पुरुषों को पत्नियों से नौकरी कराने के लाभ बताए। ताकि माँ बच्चों को कम से कम दूध पिलाए व संतान को माँ का कम से कम समय मिले। संतान में संस्कार न जाने पायें।

बाकी सारा कार्य तो इंसान ने स्वयं ही- मशीनों, ब्लू-फिल्म व नित्य नए मनोरंजन के साधनों का आविष्कार करके व धर्म को अफीम व आडम्बर, शास्त्रों को अर्थहीन, प्रगति में रोड़ा व धीमी सोच के लिए मज़बूर करने वाला मानकर त्याज्य कहकर, कर दिया।

 

डॉ. श्याम गुप्त

drgupta04@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. धन्यवाद रवि जी... मां दिवस की शुभकामनायें..

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------