शुक्रवार, 18 मई 2012

प्रमोद कुमार ‘‘सतीश’’ की बुन्देली हास्य व्यंग्य कविता - पिटाई नेताजी की

 


एक बार नेता जी पहुँचे रामलाल के ब्याओं में
ढोल बजा के बैण्ड बजा के खुबई ऐनई ताव में


बैठ गए कुर्सी पे जाके टैण्ट की वे छांव में
नॉन डेनिम की पैण्ट थी उनकी एक्शन का जूता पांव में


सोच रहे थे कछु बैठ के दिखी सुन्दरी दूर से
नेता जी की नजर पड़ी सो लगे देखने घूर के


नेता जी ने बाये बुलाओ अपने पास प्यार से
देख रहो तो बाको भइया पीछे के सब द्वार से


जैसई नेता जी ने बा कन्या को हाथ पकड़ो है
वैसई बाके भइया ने फिर नेता जी खों जकड़ो है


नेता जी ने घबरा के सबरे कपड़ा गीले कर दये
एैसौ मारो नेता जी खौं अंजर पंजर ढीले कर दये


मौं खौं पाकिस्तान बना दओ, चाँद को साऊथ अफ्रीका
एैसौ केस बनौ नेता को जैसे अफरा तफरी का


करौ कुटेशन नेता जी का सबरे रिश्तेदारन ने
जाने मारौ बाने मारौ, मारौ ऐरे गैरन ने


लातें मारी घूंसा मारे, मारे जूता बढ़ बढ़ के
नेता जी खौ सबने मारौ उनके ऊपर चढ़ चढ़ के


सबरी हड्डी टूटी उनकी बचौ न साबुत एकऊ अंग
आये अकेले नेता जी और गए तीन नरसन के संग


पहुँच गए फिर मेडिकल में पार दऔ स्टैचर पे
भऔ परीक्षण नेता जी को सबरी हड्डी फैक्चर हैं


देऊँ सलाह मैं सबखौं भईया करौ न कौनऊ एैसौ काज
ऐसे पिटवे से बच जेहो जैसे पिटे नेता जी आज


                    प्रमोद कुमार ‘‘सतीश’’

मो0 -- 09795497804
kumar.pramod547@gmail.com

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