शुक्रवार, 18 मई 2012

मयंका सिंह का आलेख - बढ़ रहा है बांझपन

मयंका सिंह (शोधार्थी)

वनस्‍थली विद्यापीठ, टोंक (राजस्‍थान)

बढ़ रहा है बांझपन

आज बदलती जीवनशैली ने जहां जीवन का स्तर बदला है, वहीं बहुत सी समस्याओं को भी जन्म दिया है। ऐसी ही समस्‍याओं की सूची में से एक है इन्‍फर्टिलिटी। हालांकि इन्फीर्टिलिटी जैसी समस्या पर लोगों का ध्यान भी अधिक समय बाद जाता है जिससे कि यह समस्या और जटिल हो जाती है। खान-पान ,नौकरियों और रहन सहन में आये बदलाव ने जहां जीवन का स्तर बदला है, वहीं कहीं ना कहीं हमारी समस्याएं भी बढा़ई हैं ।

मीडिया, काल सेंटर जैसी नौकरियों में समय की कोई बाध्यता ना होने के कारण व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समय से ना सोने और जगने से अनिद्रा, डिप्रेशन जैसी समस्याएं होना बहुत ही आम है। इन्हीं समस्याओं की सूची में से एक है ‘इन्फर्टिलिटी’। हालांकि इन्फर्टिलिटी जैसी समस्या पर लोगों का ध्यान भी अधिक समय बाद जाता है जिससे कि यह समस्या और जटिल हो जाती है।
शहरी वातावरण में बढ़ते प्रदूषण और टाक्सिन ने 45 से 48 प्रतिशत इन्फर्टिलिटी के मामले बढ़ा दिये हैं। जीवनशैली में बदलाव और खानपान की गलत आदतें भी अप्रत्यक्ष रूप से इन्फर्टिलिटी की जि़म्मेदार हैं। पेस्टिसाइड और प्लास्टिक का खानपान के दौरान हमारी फूड चेन में आना हार्मोन के स्तर को प्रभावित करता है। यूनिवर्सिटी आफ नार्थ कैरालिना, चैपल हिल के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि वो महिलाएं जो नाइट शिफ्ट में काम करती हैं उनमें समय से पहले प्रसव की सम्भावना रहती है ।

बढ़ती इन्फर्टिलिटी के कुछ प्रमुख कारण हैं

अधिक उम्र में विवाह

आज तरक्की और सफलता की चाह में पुरूष और महिला कम उम्र में विवाह नहीं करना चा‍हते । विवाह के अधिक उम्र में होने पर बच्चे् के बारे में सोचने में भी उन्हें समय लग जाता है । महिलाएं भी आज ज्यादा आत्मनिर्भर होने लगी हैं और वो कम उम्र में बच्चा नहीं चाहतीं ।
राक्लैंड अस्पताल की डाक्टर आशा शर्मा के अनुसार अधिक उम्र में विवाह होने से स्त्रियों में ओवम की क्वालिटी प्रभावित होती है और इन्‍हीं कारणों से उनमें इन्फर्टिलिटी की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

दूसरे कारण जो आजकल अधिकांश स्त्रियों में पाये जा रहे हैं वो हैं फाइब्रायड का बनना, एन्डोमैंट्रियम से सम्बन्धी समस्याएं। उम्र के बढ़ने के कारण हाइपरटेंशन जैसी दूसरी समस्याएं भी आ जाती हैं और इनके कारण महिलाओं में फर्टिलिटी प्रभावित होती है ।

काम के दबाव के साथ व्यायाम और नींद की कमी

काम के दबाव के कारण व्यायाम का समय निकालना हर किसी के लिए बहुत मुश्किल होता है । काल सेन्टर और मीडिया की नौकरी में समय की बाध्यता ना होने के कारण काम का दबाव और प्रतियोगिता भी दिनों दिन बढ़ती जा रही है । इन कारणों से पूरी नींद ना सो पाना भी बहुत से लोगों में आम है ।

हेड आफ गायनाकालाजिस्ट डिपार्टमेंट मिसेज दिनेश कन्सल का कहना है कि आज हमारे जीवन में रीप्रोडक्शन से ज्यादा ज़रूरी हो गयी है हमारी तरक्की और इसी कारण से हमारा ध्या‍न घर से ज्यादा अफिस के कामों में लगा रहता है । अधिक समय तक काम करने के बाद आफिस से थककर घर आने के बाद अधिकतर कपल्स में सेक्स की इच्छा में भी कमी हो जाती है।

डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर हृदय से सम्बन्धी परेशानियां

हाइपरटेंशन और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं जिन्हें कि बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था । आज वह युवाओं में भी बहुत आम हो गयी हैं और इनका प्रभाव व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ पर भी पड़ता है ।
हेड आफ गायनाकालाजिस्ट डिपार्टमेंट मिसेज दिनेश कन्सल जीवनशैली में बदलाव को इन्फर्टिलिटी का कारक मानती हैं । डायबिटीज़, पी सी ओ डी (पालीसिस्टमिक ओवरियन डिज़ीज़) के कारण महिलाओं मे बहुत सी बीमारियां आम हो गयी हैं । 60 से 70 प्रतिशत महिलाओं में ओवुलेशन की क्रिया ही नहीं होती । वज़न का बढ़ना और व्यायाम की कमी के कारण भी सही मात्रा में हार्मोन नहीं बन पाते। बचपन से ही लोगों में कंप्‍यूटर और लैपटाप पर बैठना आम है और यह कारण भी कहीं ना कहीं इन्फर्टिलिटी के जि़म्मेदार होते हैं।

धूम्रपान , कोकीन और स्टेरायड का इस्तेमाल

धूम्रपान , कोकीन और स्टेरायड के इस्तेमाल से सीमेन की गुणवत्ता खराब हो जाती है। धूम्रपान से स्पर्म की गिनती और गतिशीलता कम होती है और यह होने वाले बच्चे में आनुवांशिक तौर पर बदलाव भी कर सकता है । इसी प्रकार से अल्कोहल भी टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को कम करता है।
गायनाकालाजिस्ट अल्का सिन्हा‍ के अनुसार किसी प्रकार की दवाओं या ड्रग्स के गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण भी इन्फर्टिलिटी हो सकती है। स्टेरायड जैसे हार्मोन हमारे शरीर के हार्मोन के स्त‍र में बदलाव लाते हैं जो कि हमारे स्वास्‍थ्‍य को भी प्रभावित कर सकते हैं। बीमारी होने पर भी चिकित्सक की सलाहानुसार ही दवाएं लेनी चाहिए।
हम कह सकते हैं कि विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है और बहुत सी बीमारियों के उपचार भी ढूंढ निकाले है लेकिन इनफर्टिलिटी जैसी समस्या से निदान पाना कई स्थितियों में बहुत मुश्किल हो जाता है और कभी कभी नामुमकिन।
इनफर्टिलिटी के बहुत से कारक हो सकते हैं, लेकिन ऐसी समस्या पर समय पर ध्यान देकर आप मातृत्व और पितृत्व का सुख उठा सकते हैं

  • अधिक उम्र में विवाह होने पर चिकित्सक का परामर्श लें।
  • अगर आप विवाह के तुरंत बाद बच्चा नहीं चाहते, तो भी चिकित्सक से सम्पर्क करें।
  • शराब, सिग्रेट, कोकीन जैसे मादक पदार्थों से दूर रहें।
  • अस्वस्थ सेक्सुअल आदतों से बचें।
  • स्वस्‍‍थ आहार लें और आफिस के बाद सैर पर जाएं या प्रतिदिन व्यायाम के लिए कुछ समय ज़रूर निकालें।

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