शुक्रवार, 18 मई 2012

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - मुंह बंद रखो

yashwant kothari latest 2 (Custom) (3)

मैंने कहा मैं कुछ बोलना चाहता हूँ। उन्‍होंने कहा मुंह बन्‍द रखों या वो बोलो जो सरकार कहती है, बोलती है या समझाती है। मैंने पूछा-

क्‍या मैं बिहार में पोजिटिव समाचारों पर बोल सकता हूं, वे बोले बिहार में जाकर बोलो।

मैंने कहा क्‍या मैं सरकारी पुस्‍तकालयों में खरीदे जाने वाले अखबारों के नामों को बोल सकता हूँ वे बोले बंगाल में जाकर बोलो।

मैंने कहा क्‍या मैं कोयले की खदान में हुए घपले पर बोल सकता हूँ।

नहीं नहीं। तुम कोयले की दलाली में काले हाथ क्‍यों करना चाहते हो।

मैंने कहा क्‍या मैं स्‍वास्‍थ्‍य घोटाले पर बोल सकता हूँ। वे बोले यू․पी․ में जाकर बोलो। मैंने कहा क्‍या में हाई वे घोटाले पर बोल सकता हूँ वे बोले तुम सड़क छाप क्‍यों बनना चाहते हो। अपने स्‍तर का ध्‍यान रखो।

मैंने फिर पूछा क्‍या मैं कन्‍या भ्रूण हत्‍या, किसान आत्‍महत्‍या, शिशुमातृ मृत्‍युदर पर बोल सकता हूँ। वे फिर नाराज हो गये मुझे कहा-तुम ये फालतू की बातें क्‍यों बोलना चाहते हो। आई पी एल देखो। चीयर बालाओं का डांस देखो और मस्‍त रहो।

मैं नहीं माना-मैंने फिर पूछा क्‍या मैं जी घोटाला, 2टू जी घोटाला थ्री जी घोटाला, फोर जी घोटाला, फाइव जी घोटाला, कोमन वेल्‍थ घोटाले पर अपने विचार व्‍यक्‍त कर सकता हूँ -वे बोले चुप रहने में ही समझदारी है।

मैंने फिर पूछा क्‍या मैं लोकपाल, जन लोकपाल पर अपनी बात कह सकता हूँ। वे बोल पड़े नहीं इससे तुम्‍हें ही नुकसान हो सकता है। मैं चुप हो गया। मगर मेरे से चुप रहा नहीं गया मैंने फिर पूछा।

क्‍या सेनाध्‍यक्ष की जन्‍मतिथि, सेना के कूच और टेट्रा ट्रक पर बोल सकता हूँ। वे बोले चुप रहो नहीं तो एनकाउण्‍टर कर दिया जायेगा। किसी को पता भी नहीं चलेगा।

मैंने फिर पूछा क्‍या मैं विसिल ब्‍लोअर पर बोल सकता हूँ। वे बोले चुप रहो नहीं तो तुम्‍हारी विसिल बजा दी जायेगी। चाहो तो बार डान्‍स देख सकते हो।

मैंने फिर पूछा क्‍या मैं दलाली, कमीशन, रिश्‍वत, हत्‍या आत्‍महत्‍या, सी․ए․ जी․ रिपोर्ट, रक्षा सौदों, किक बेक, विपक्ष-पक्ष, सरकार, सलाहकार, टेण्‍डर, कोटेशन, ठेका, गठबन्‍धन धर्म, रेल-किराया,त्‍यागपत्र आदि पर कुछ बोल सकता हूँ।

नहीं नहीं तुम इन शब्‍दों को काम में भी नहीं ले सकते।

तो क्‍या मैं प्रेस ,सेंसरशिप, नेगेटिव समाचार कथा पर बोल सकता हूँ। नहीं तुम केवल वो सब बोलो जो हम तुम्‍हें कहते हैं। वो सब छापो जो हम भेजते हैं और वो सब दिखाओ जो हम चाहते हैं क्‍यों कि गांधी जी ने कहा था- बुरा मत देखो, बुरा मत सुनों और बुरा मत बोलो। लेकिन एक बच्‍ची पूछ रही है कि उन्‍हें राष्ट्रपिता किसने कहा। बच्‍ची की बात पर ध्‍यान मत दो। वो तो राजा को भी नंगा कहती है, तुम मत कह देना।

तो क्‍या मैं पार्टी के आन्‍तरिक लोकतन्‍त्र पर बोलू। पार्टी मंच पर बहस करुं।

पागल हो गये हो क्‍या। राज्‍य सभा में जाना चाहते हो तो चुप रहो।

मैंने फिर पूछा क्‍या मैं संतुष्ट,असंतुष्ट और दुष्टों के बारे में बोलूं। आखिर अभिव्‍यक्‍ति की आजादी है बोल कर तो देख ।

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यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

․09414461207

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  1. कल 29/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सही व्यंग्य/कटाक्ष.
    क्या आजादी ऐसी अभिव्यक्ति की!!

    सादर,

    उत्तर देंहटाएं

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