सोमवार, 28 मई 2012

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - जाँच की महामारी

आजकल हर दिन सरकार की ओर से एक आश्‍वासन मिलता है- अगर कहीं गलत हुआ है तो जांच करायेंगे। जांचें जारी रहती हैं। परिणाम कभी नहीं आते। हर गलत काम की प्राम्‍भिक जांचें होती हैं और स्‍थायी परिणाम ये आता है कि जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। सरकारी धन का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ केवल कुछ सामान्‍य प्रक्रिया का उल्‍लघंन हुआ जो कि सरकार में एक सामान्‍य प्रक्रिया है। प्रक्रिया में भी सरकार की मंशा अच्‍छी थी। सम्‍बन्‍धित मंत्रियों, अफसरों के इरादे नेक थे। कार्यो को तेज गति से पूरा करने तथा बजट का शीघ्र व प्रोपर उपयोग करने में सब चलता है। जांच एजेन्‍सीज का काम है जांच करना और सरकार का काम है विकास के कार्यो को तेजी से पूरा करना। मार्च में तो करोड़ो अरबों रुपयों को सरकार अन्‍य संस्‍थाओं को देकर लेप्‍स होने से बचा लेती है और धीरे धीरे जांचें चलती रहती हैं।

सरकार हर जांच के बाद कहती है दोषियों को बक्‍शा नहीं जायेगा। दोषियों को सजा मिलेगी। सरकारी धन वापस वसूल किया जायेगा। मगर होता कुछ नहीं है। कई बार जांच के बाद रिपोर्ट के बारे में अफसर या मंत्री कह देते है-मैं तो अभी आया हूं। अभी अभी जोईन किया है। मेरे आने से पहले का मामला है। ज्‍यादा होशियार मंत्री-अफसर कहते है-मामले को दिखवायेंगे। हमें तो पता ही नहीं था आपने बताया तो पता चला। अभी चेक कराता हूं। दोषी बचेगे नहीं। मगर दोषी बच जाते हैं। जो ज्‍यादा खुर्राट होते हैं वे पूर्ववर्ती सरकार पर दोपारोपण कर देते हैं और जनता को धन्‍यवाद दे देते हैं कि ऐसी नाकारा सरकार को उसने उखाड़ फेंका। जांचें चलती रहती हैं। सरकारें भी चलती रहती हैं। घपले, घोटाले, भ्रप्‍टाचार भी चलते रहते हैं। सरकार कड़े कदम उठाने की घोषणा करती है। कठोर निर्णय लेने की कसमें खाती है। ज्‍यादा छेडने पर सरकारें विदेशी हाथ होने का राग अलापने लग जाती हैं। सरकार कहती है कुछ देश में अस्‍थिरता पैदा करना चाहती है, हम इन ताकतों को सफल नहीं होने देंगे।

जांचो से जांच एजेन्‍सीज व मीडिया को फायदा होता है। जांच रिपोर्ट लीक कर मीडिया टी आर पी व पत्रिका की बिक्री बढ़ा लेता है। सम्‍पादक राज्‍यसभा में चला जाता है या मंत्री के साथ विदेश चला जाता है।

जांच कराते रहो ओर रिपोर्ट को धूल खाने के लिए पटकते रहो। कभी कदा कोई काम की जांच रिपोर्ट हो तो मण्‍डल-कमीशन की तरह काम में ले लो बस। सरकार संसद या विधानसभा में जांच की घोपणा करते ही विपक्षी चुप हो जाते हैं। रिपोर्ट आने तक चुनाव आ जाते हैं। नई सरकार जांच रिपोर्ट को बर्फ में लगा देती है। ठण्‍डे बस्‍ते में डाल देती है। जांच समिति का यही उपयोग है कि किसी सेवा निवृत्‍त जज को काम मिल जाता है।

जांच जारी है और भ्रष्टाचार भी जारी है। घोटाले भी जारी है और घपले भी जारी है। ये एक महामारी है।

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यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

2 blogger-facebook:

  1. यसवंत कोठारी का व्यंग्य जांच की महामारी अच्छा लगा..

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  2. बेनामी3:50 pm

    ययसवंत कोठारी का व्यंग्य जांच की महामारी अच्छा लगा वीरेन्द्र कुमार कुदरा..

    उत्तर देंहटाएं

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