मंगलवार, 15 मई 2012

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - मूर्खता

मूर्खता

रामदास बैठे हुए देख रहे थे कि उनकी बेटी सरला काफी देर से मोबाइल पर बात कर रही है। और बातचीत के दौरान ईयर पीस को कान से हटाकर मुँह के पास लाकर कुछ कहती है और तुरंत फिर कान से लगा लेती है। रामदास ने बातचीत के दौरान टोकना उचित नहीं समझा।

बात समाप्त होने पर उन्होंने बेटी को पास बुलाया और बोले “ बात करते समय तुम ईयर पीस को बार-बार मुँह के पास लाकर क्यों बोल रही थी” ? बेटी बोली “ताकि दूसरी तरफ आवाज स्पष्ट और तेज सुनाई पड़े”।

यह सुनकर रामदास हँसने लगे और बोले “तुम पढ़ी-लिखी हो। पोस्ट-ग्रेजुएट कर चुकी हो और इतना भी नहीं जानती कि ईयर पीस से केवल आवाज आती है। इसलिए उसे कान से लगाकर बात किया जाता है। इससे आवाज जाती नहीं है। आवाज माइक्रोफोन पीस से बाहर जाती है। और माइक्रोफोन पीस मोबाइल में अक्सर नीचे होता है। इसलिए मोबाइल से बात करते समय यदि मुँह के पास लाकर कुछ कहना ही हो तो माइक्रोफोन पीस को लाकर कहना चाहिए। ईयर पीस को मुँह के पास लाकर कुछ कहना मूर्खता है।

कान के पास मुँह लाकर कई लोगों को बात करते हुए देखा होगा। मुँह के पास मुँह लाकर बात थोड़े की जाती है”।

सरला के हँसी छूट गई और बोली “मैंने ऐसा कई लोगों को करते हुए देखा है। कॉलेज में कई लड़कों व लड़कियों को, रास्ते में कई लोगों को और अपने अध्यापकों को। रामदास फिर हँसे और बोले “ जब अधिक पढ़े-लिखे लोग ही मूर्खता करते हैं तो कम पढ़े-लिखे अथवा अनपढ़ लोग मूर्खता करें तो कोई आश्चर्य नहीं”।

सरला कुछ सोचती हुई घर के अंदर चली गई। उसे रह-रहकर अपनी मूर्खता पर हँसी आ रही थी।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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