यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - कथा - समाचार - कथा की

कथा-समाचार -कथा की

वे तीन थे। अलग अलग जगहों पर काम करते थे। एक एक अखबार में था। दूसरा एक स्‍थानीय चेनल में था और तीसरा कला-साहित्‍य-संस्‍कृति का स्‍थायी समीक्षक और अस्‍थायी लेखक था। सवेरे से वे तीनों ताजा समाचार, या बासी बाइट की तलाश में घूम रहे थे। उन्‍हें बेहद गुस्‍सा आ रहा था। इस सड़ियल शहर पर जहां पर अखबार या चैनल का पेट भरने के लिए एक शानदार ना सही कमजोर सी समाचार कथा भी नहीं मिल रही थी।

तीनों हैरान-परेशान थे। समाचार, सम्‍पादक या चैनल रुपी दैत्‍य का पेट भरने के लिए वे भटक रहे थे, अन्‍त में तीनो इस नतीजे पर पहुँचे कि सर्व प्रथम चैनल पर एक देह धर्मिता की वाइट दिखाई जाये फिर उस बाइट पर समीक्षक को विशेषज्ञ के रुप में दिखाया जाये और अन्‍त में चल कर संवाददाता इस पूरे प्रकरण पर एक सचित्र समाचार लगा देगा। देह-धर्मिता से चर्चा-धर्मिता और अन्‍त में रचना-धर्मिता का ऐसा घाल-माल हो जायेगा कि पाठक या दर्शक सब वाह वाह या आह आह कह उठेगा। योजना-अनुसार वे फिर बाइट की तलाश में सड़कों पर भटकने लगे। आखिर बाइट मिली। और कार्यवाही शुरु हुई। कैमरा मेन ने शाट लिया। और चल पड़े। इस पूरे मामले में एक गड़बड़ हो गई। जिस बाइट को दिखा या जा रहा था उसकी हिरोईन ने देह धर्मिता के बजाय चर्चा धर्मिता का राग अलापना शुरु कर दिया। बोल पड़ी-समाचारों के इस अकाल में देह की मण्‍डी क्‍यों लगाते हो ?

विशेपज्ञ महोदय जो मामले को पिकासो और एम․एफ․ हुसैन तक खींचना चाहते थे, चुप्‍पी साध गये। मगर एक चैनल से निकला ये शगूफा कई चैनलों की चार दिवारी से टकरा गया। संवाददाता के सचित्र समाचारों पर महिला संगठनों, नारी वादियों और विमेन-लिब वालों ने धमाल मचा दी ।

चैनल पीछे रह गये चरित्र आगे आ गया। महिला आयोगो ने भी आग में घी डाला और चरित्र की चटनी अचार, सॉस आदि बनाने में मशगूल हो गये।

चैनल-समाचार पत्र-संवाददाता सब व्‍यस्‍त हो गये। वे बार बार रचना धर्मिता के नाम पर देह धर्मिता परोसने में लग गये। चर्चा-धर्मिता का निर्वहन अपने आप में हो रहा था। चर्चा, देह, रचना के इस चक्रव्‍यूह में चैनल रुपी दैव्‍य का पेट भी भर रहा था। तीनों खुश थे कि चलो अब कुछ समय के लिए सब ठीक ठाक रहेगा। वे फिर श्‍शामको इकठ्‌ठा हुए, आचमन के पश्‍चात किसी नई स्‍टोरी की तलाश में भटकने लगे। समाचार -कथा की तलाश कभी खतम नहीं होती।

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यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर - 2, फोन - 2670596

म․उंपस प्‍क्‍ ․ लाावजींतप3/हउंपसण्‍बवउ

उ․․09414461207

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