मंगलवार, 15 मई 2012

शिल्पी चौहान की कविताएँ - माँ, बेटियाँ

माँ

समुद्र है प्‍यार का
अहसास है विश्वास का
माँ कहते हैं उस ताकत को
जो नाम है भगवान का
बच्‍चों की तमन्‍ना व जरूरत है माँ
यही या कुछ और है माँ
जीवन का हर अहसास है माँ
बच्‍चों की आँखों से दिल को जान जाना
बिन कहे हर बात समझ जाना,
क्‍या कहें उनके बारे में जो खुद
तो इन्‍सान पर बच्‍चों के लिए भगवान हैं
जीती है दुनिया नाम से इनके
नाम से सारा जहाँ है इनके
ये कुदरत की सच्‍चाई, खुदा की खुदाई है

माँ ही एक प्‍यार की मूरत बनाई है
दरिया है प्‍यार का, नाम है भगवान का
माँ कहते हैं जिसे, स्‍थान है भगवान का।

--

बेटियाँ
बडी बेटियाँ , बेटियाँ कम, अधिक सहेली हो जाती हैं,
जब घर में केवल बेटे हों, माएँ और अकेली हो जाती हैं।
शोर शराबे वाले घर में बेटी चुप का कोना है
बेटी का ही होना घर में, पूरे घर का होना है।
चुप-चुप रहती हैं बेटियाँ , माँ की चेली हो जाती हैं।
मन उड़ने का कभी हुआ तो, पंख धरे बेटी के मिलते,
मन के घाव नहीं दिखते, घाव हरे बेटी के मिलते,
जब भी टीस बढ़ी दांतों में, दवा की गोली हो जाती हैं।
अपना हिस्‍सा नहीं मांगती, खुद हिस्‍सा बन जाती हैं,
मन की आंखें वो छलनी हैं, जहाँ बेटियाँ छन जाती हैं।
उन्‍हें पता है दर्द कहाँ हैं, किस शीशी में दवा कहाँ हैं,
मन का चेहरा जब हँसता है, खिली चमेली हो जाती हैं।
औरत से औरत का रिश्ता, बिन कहे सब कह जाता है,
आँगन से नाली का पानी, धीरे धीरे बह जाता है।
बनती जब फूल बेटियाँ , खुली हथेली हो  जाती हैं
बडी बेटियाँ , बेटियाँ कम, अधिक सहेली हो जाती हैं।

--

shilpi chauhan
Research Scholar
Banasthali University.
(Rajasthan)

8 blogger-facebook:

  1. बेनामी4:46 pm

    bahut achhi abhivyakti hai apki.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. shweta dubey (banasthali vidyapith)11:13 am

    oye shilpi... bahut pyari si kavita hai... betiyo ka naam roshan kar diya tumne kavita me. all the best.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

    उत्तर देंहटाएं

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