विजय वर्मा की ग़ज़ल - योजनाएँ

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ग़ज़ल 

योजनायें 

योजनाओं में फिर तारे तोड़ लाने की तैयारी है

आसमां भी हँस रहा 'यह मानसिक बीमारी है'.

 

रिकार्ड उत्पादन हुआ है ,यह दावा सरकारी है;

भूख से जनजातियों की बदस्तूर मौत जारी है.

 

सरकारी योजना के तहत आवास आवंटित हुआ 

मुट्ठी में करने को मुट्ठी गर्म करना लाचारी है.

 

दस प्रतिशत राशि ही पहुंचता रहा गंतव्य तक

बाकी पैसे  की बीच में बंदरबाट की तैयारी है.

 

जिस बट-वृक्ष की छाह में तुम  उम्र-भर रहे

उसे काटने को ही क्या हाथ में कटारी है?

 

हमने तो अपने दर्द को आपके रु-ब-रु कर दिया 

अब आप भी तो कुछ कहें,अब आप की ही बारी है.

 

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v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

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