रविवार, 13 मई 2012

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - खबरदार! जो कार्टून बनाया।

हे कार्टूनिस्‍टों! खबरदार जो कार्टून बनाया। कार्टून बनाने पर जेल हो सकती हैं। पिटाई हो सकती है यदि एक पचास साल पुराने कार्टून को पाठ्‌य पुस्‍तक में शामिल कर दिया तो सलाहकार पद छिन सकता है। सरकार को संसद में माफी मांगनी पड़ सकती है अतः है कार्टूनकारों व्‍यग्‍ंयकारों कोई दूसरा काम शुरु करो। ये कार्टून बनाना, व्‍यग्‍यं लिखना बन्‍द करो। नहीं तो कभी जेल जाना पड़ सकता है। ममता दीदी ने एक प्रोफेसर को कार्टून बनाने पर जेल भेज दिया। उनका ये सुझाव भी अच्‍छा है कि समाचार मत देखो। समाचार मत पढ़ो। अगर समाचार देखोगे तो जेल जाओगे।

इस सम्‍पूर्ण प्रकरण पर मेरे कवि मित्र बहुत खुश थे। बोले मैं तो पहले ही कहता था कि व्‍यंग्‍य लिखना बन्‍द कर दो। व्‍यंग्‍य लिखोगे तो पिटोगे। जेल जाओगे। हरिशंकर परसाई को पीटा गया और मंटो को जेल हुई। मुकदमे चले कवि मित्र आगे बोले मैं तो भईया सरकार और व्‍यवस्‍था के हित में कविता लिखता हूं। और मजे करता हूं। सरकार की विरुदावली गाता हूं और राज्‍य सभा में जाने का डोल जमाता हूं। अतः कविता लिखो सत्‍ता चालीसा लिखो पार्टी के चुनाव के लिए नारे लिखो और पदमश्री पाओ। क्‍या रखा है कार्टून बनाने और व्यंग्य लिखने में।

मैं कविमित्र की सलाह मानना चाहता हूं, मगर ये सम्‍भव नहीं दीखता क्‍योंकि स्‍वभाव तो कार्टून बनाने केरिकेचर बनाने और व्यंग्य लिखने का पड़ा हुआ है। अब स्‍वभाव बदलना बहुत मुश्‍किल है। मैं अपने साथियों से भी कहता हूं यारो कविता लिखो, दोहे लिखो सत्‍ता की जय जयकार करो। कार्टून बनाने से बाझ आओ। यदि नहीं माने तो सत्‍ता-व्‍यवस्‍था तुम्‍हें जेल में डाल देगी। तुम्‍हारी पिटाई करेगी और ज्‍यादा जरुरी हुआ तो एनकाउन्‍टर कर देगी या फिर साम दाम दण्‍ड भेद से तुम्‍हे खरीदने की कोशिश करेंगी। वैसे भी तंज कसने से रंज होता है। पचास साल पुराने कार्टून पर बवाल इसी सोच का परिचय देता है। अतः यारों कार्टून बनाना बन्‍द करो। जरुरी हो तो शब्‍दों चित्रों का व्‍यापार बन्‍द करके आलू-कान्‍दा बेचना शुरु कर दो आज कल उससे व्‍यवस्‍था के नाराज होने का खतरा नहीं है।

हे व्‍यग्‍ंयकारों कार्टूनकारों सत्‍ता के सर पर नहीं पांव पर कलम-कूंची रखो ताकि तुम्‍हारा कल्‍याण हो मगर ओल्‍ड हेबिट्स डाइ हार्ड। वैसे कार्टून वाला रास्‍ता भी जनता की संसद में जाता है यारों।

0 0 0

यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर, जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

․․09414461207

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------