रविवार, 6 मई 2012

विजेंद्र शर्मा के दोहे - बिन सोचे ही हो गया , इसी लिए है प्यार ! गर करता मैं सोच के ,फिर था कारोबार !!

image

इतना हमें नवाज़ दे , मौज रहे भरपूर !

इतना भी मत  दीजियो , मन में आय गुरूर !!

*******

मर्यादा की पालना , लाख टके की चीज़ !

अपनी सीमा में रहो, लाँघो ना दहलीज़ !!

******

भावुकता वरदान है , तभी आँख में नीर !

समझो जग की पीर को , हो जाओगे पीर !!

*******

क्या -क्या हमको दे गये , तुलसी मीरा सूर !

नस्ल हमारे दौर की , इनसे भागे दूर !!

*****

बिन सोचे ही हो गया , इसी लिए है प्यार !

गर करता मैं सोच के ,फिर था कारोबार !!

*****

पापा मेरी चाँद को ,  छूने की है चाह !

दिन है खेलन के यही , मत कर मेरा ब्याह  !!

******

जिसको भी मौक़ा मिला , उसने भर ली जेब !

लोग अदब के नाम पे , देते रहे फरेब !!

******

दे जाता है वक़्त भी , क्या - क्या हमको सीख !

देता था खैरात जो ,  वो अब माँगे भीख !!

*******

जिसकी ख़ातिर ओढ़ ली , हमने यार ! ज़मीन !

उसको आया ही नहीं , हम पे कभी यक़ीन !!

*****

दिल में उसकी याद है, आँखों में है नीर !

यार ! हमारे पास है , बहुत बड़ी जागीर !!

  ********

एक बार जब इश्क़ का , दिल पर चढ़े सरूर !

कौन भला फिर मानता ,दुनिया का दस्तूर !!

*******

सम्बन्धों की राह में , आये ऐसे मोड़ !

कभी- कभी मन यूँ करे , नाते दूँ सब तोड़ !!

*******

दिन - भर झिक - झिक बॉस की , दफ़्तर लगे कलेश !

घर पर आते ही सुनो ,   बीवी के उपदेश !!

  ***

इंतज़ार के रंग में ,   गयी बावरी डूब !

होली पर इसबार भी , आया ना महबूब !!

*****

सच करना था झूठ को, बोले कितने झूठ !

जो मैं सच ही बोलता , आफत जाती छूट !!

*****

इक सच बोला और फिर , देखा ऐसा हाल !

कुछ ने नज़रें फेर ली,कुछ की आँखें लाल !!

****

तपने से परहेज़ है ,   छपने का है चाव !

जो दिख लावे आइना ,उस पे खावे ताव !!

******

पहरेदारी मुल्क़ की , सौंप हमारे हाथ !

पूरा भारत चैन से , सोये सारी रात !!

*******

कहाँ गई वो लोरियां , कहाँ गये वो चाव !

बच्चों ने भी फाड़ दी , काग़ज़ वाली नाव !!

*****

शुहरत की आग़ोश में , हुए खूब मशहूर !

पर अपनों से हो गये , यारों कौसों दूर !!

*****

हिन्दी -उर्दू बैठ के , एक साथ में रोय

आशिक़ दोनों   के बड़े  , माँग   भरे   ना   कोय

*******

होंठ लगे जब काँपने, करने में इज़हार !

तब नैनों ने ये कहा , मुझको तुमसे प्यार !!

उल्टा - सीधा जो लिखे , मत कह उसे अदीब !

पुस्तक बेचन के लिए ,   है सारी तरक़ीब !!

दिल की चादर तंग है , कहाँ पसारें पाँव !

चलें यार इस शहर से, अपने-अपने गाँव !!

*****

ख़ूब वकालत आपकी , कैसे आप वकील !

ना तो कोइ सुबूत है , ना है कोइ दलील !!

सत्ता पाने के लिए ,   नित्य नए गठजोड़ !

लिया किसी को जोड़ तो , दिया किसी को छोड़ !!

***

ख़्वाब हमारे भी कभी ,हो सच में तब्दील !

सपनों में ही काट दी , हमने उमर तवील !!

(तवील -लम्बी )

******

इश्तिहार के रंग में , रंगा गया अखबार !

ख़बर हो गई बे-ख़बर ,सम्पादक लाचार !!

*****

रौनक रिश्ते में रही , जब तक बोला झूठ !

ज्यों सच बोला त्यों पड़ी ,संबंधों में टूट !!

**********

जीवन के आकाश में ,  हम तो हुए पतंग !

डोर किसी के हाथ में ,उड़े किसी के संग !!

*****

जग ज़ाहिर होती नहीं ,इस रिश्ते की थोथ !

भीतर है कड़वाहटें, बाहर करवा चोथ !!

******

सूने -सूने रास्ते ,पसरी - पसरी रेत !

गीले -गीले नैन है ,सूखे -सूखे खेत  !!

*****

तुझको जो है बोलना ,   तू जो चाहे बोल !

पर मज़हब के बाट से ,भाषा को मत तोल !!

दुःख ने सुख़ से ये कहा ,  कैसी तेरी ज़ात !

याद ख़ुदा ना आय फिर ,तू हो जिसके साथ !!

*****

देने वाले कौन है, लेने वाले कौन !
ईनामों की बाँट पर ,लेकिन सब है मौन !!

***

सच का अपना खेल है ,खेल सके तो खेल !

जलता है सच का दिया ,बिन बाती बिन तेल !!

नाम ----- विजेंद्र शर्मा

शिक्षा ---- B.Tech (ELECTRICAL)

जन्म ---- 15aug 1972   हनुमान गढ़  ( राजस्थान)

सम्प्रति-- सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट  के पद पे बीकानेर में कार्यरत

समकालीन शाइरों पे बहुत से मज़मून  ,प्रतिष्ठित समाचार के लिए स्तम्भ लेखन

9 blogger-facebook:

  1. बहुत ही सुंदर अनुभव एवं प्रासंगिकता भरे दोहे । आपकी भाषा और शैली देखकर लगता था आप अध्यापन के क्षेत्र में होंगे परंतु आप सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट के पद पर हैं और भी अच्छा लगा । आप इसी तरह लिखते रहिए । हम पढ़ते रहेंगे ।

    कैप्टन मोहसिन ख़ान
    अलीबाग (महाराष्ट्र)
    09860657970 / 08793816539
    khanhind@gmail।com

    उत्तर देंहटाएं
  2. चिंतन और व्यंग्य का सामंजस्य

    उत्तर देंहटाएं
  3. चिंतन और व्यंग्य का अच्छा सामंजस्य .

    उत्तर देंहटाएं
  4. Respected Vijendra ji,

    Aapke dohe bahut achhe hain. But I have found them on another blog. Link is: http://gautamnarendramohan.blogspot.in/2012/05/blog-post_3254.html.
    There, the author has published these without mentioning your name in such a manner that gives an impression that it is written by him. Kindly do the needful.

    CA. Anurag Tiwari

    उत्तर देंहटाएं
  5. anurag jee shukriyaa .....
    dekhtaa hun....pahle un saahab se baat kartaa hun....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहोत ही सुंदर ओर सटीक दोहे हे,
    जिनमें सत्यं का मर्म हे,

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहोत ही सुंदर ओर सटीक दोहे हे,
    जिनमें सत्यं का मर्म हे,

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------