शुक्रवार, 18 मई 2012

अमरीक सिंह कंडा की लघुकथा - चुनाव नीति

चुनाव नीति

मंत्री जी के टेबल पर प्रसिद्ध बाबाओं की फाइलें पड़ी थीं।

‘‘सर, यदि इनमें से 2 बाबे भी हमारी पार्टी को सपोर्ट कर दें तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक सकती। लोग इन बाबाओं के पीछे हैं और इन बाबाओं को हम ने अपने पीछे लगाना है।’’ यह बात मंत्री जी के पी.ए. ने उनसे कही।

मंत्री जी ने अपने पी.ए. के एक थप्पड़ जड़ा और कहा, ‘‘बेबकूफ, यदि ये बाबे ही मुझे प्रधानमंत्री बना सकते थे तो तुमने मुझे पहले ही क्यों नहीं बताया। हम ने बिना बजह ही दंग-फसाद, बम ब्लास्ट, बैंक डकैतियां, कत्लेआम करवाते रहे। मुझे तो आज पता चला कि इन बाबाओं में राजनीति होती है। मेरे सारे टूर प्रोग्राम कैंसिल कर दो। मुझे तो पता नहीं था कि जनता इनती मूर्ख है।’’

भावी प्रधानमंत्री का काफिला बाबाओं के आश्रमों की ओर चल पड़ा। करोड़ों के सौदे के बाद मंत्री जी प्रधानमंत्री में परिवर्तित हो गए।

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------