अमरीक सिंह कंडा की लघुकथा - चुनाव नीति

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चुनाव नीति

मंत्री जी के टेबल पर प्रसिद्ध बाबाओं की फाइलें पड़ी थीं।

‘‘सर, यदि इनमें से 2 बाबे भी हमारी पार्टी को सपोर्ट कर दें तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको प्रधानमंत्री बनने से नहीं रोक सकती। लोग इन बाबाओं के पीछे हैं और इन बाबाओं को हम ने अपने पीछे लगाना है।’’ यह बात मंत्री जी के पी.ए. ने उनसे कही।

मंत्री जी ने अपने पी.ए. के एक थप्पड़ जड़ा और कहा, ‘‘बेबकूफ, यदि ये बाबे ही मुझे प्रधानमंत्री बना सकते थे तो तुमने मुझे पहले ही क्यों नहीं बताया। हम ने बिना बजह ही दंग-फसाद, बम ब्लास्ट, बैंक डकैतियां, कत्लेआम करवाते रहे। मुझे तो आज पता चला कि इन बाबाओं में राजनीति होती है। मेरे सारे टूर प्रोग्राम कैंसिल कर दो। मुझे तो पता नहीं था कि जनता इनती मूर्ख है।’’

भावी प्रधानमंत्री का काफिला बाबाओं के आश्रमों की ओर चल पड़ा। करोड़ों के सौदे के बाद मंत्री जी प्रधानमंत्री में परिवर्तित हो गए।

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1 टिप्पणी "अमरीक सिंह कंडा की लघुकथा - चुनाव नीति"

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