सोमवार, 28 मई 2012

चाचा जी की चिट्ठी सीताराम गुप्ता के नाम

CHACHAJI KI CHITTHI SITA RAM GUPTA KE NAAM-1 (Custom)

CHACHAJI KI CHITTHI SITA RAM GUPTA KE NAAM-2 (Custom)

अब उपरोक्त पत्र को ही लीजिए जो बहुत कम लोगों द्वारा समझी जाने वाली लिपि में लिखा गया है। भाषा तो स्वाभाविक है हिन्दी ही है लेकिन इस लिखावट को मुण्डी हिन्दी कहा जाता है। इसमें मात्राएँ न के बराबर हैं। केवल व्यंजनों से काम चलाना पड़ता है। किसी प्रकार के विराम चिह्नों का प्रयोग भी नहीं किया जाता। अत्यंत अवैज्ञानिक है ये लिपि अतः यदि पढ़नेवाला ग़लत पढ़ जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है। आज कंप्यूटर के दौर में भी वैश्य समुदाय के अनेकानेक लोग और मुनीम वग़ैरा बही-खाता करने के लिए इस लिपि का इस्तेमाल करते हैं। इस लिपि को सीखना अत्यंत सरल है। मात्र एक-डेढ़ घण्टे के अभ्यास द्वारा इसे पढ़ना और लिखना सीखा जा सकता है। मैंने बचपन में इस लिपि को सीख लिया था लेकिन इस्तेमाल न होने के कारण भूल जाता था। कभी ज़रूरत पड़ती तो उसी वक़्त दस-पाँच मिनट में दोबारा सीख लेता और अपेक्षित कार्य सम्पन्न कर लेता। वही सिलसिला अद्यतन जारी है। उपरोक्त चिट्ठी को पढ़ने में आज भी मुझे आठ-दस मिनट लग ही गए। चाचाजी छत्तीसगढ़ के एक गाँव में रहते थे और हम दिल्ली में। हमारे बीच संपर्क का साधन ये चिट्ठियाँ ही होती थीं। चाचाजी की चिट्ठियाँ आती तो इसी मुण्डी हिन्दी में थीं लेकिन मैं जवाब प्रायः देवनागरी में लिखता था जिसे वो बच्चों से पढ़वा लेते थे। कभी-कभार मैं भी मुण्डी हिन्दी में जवाब दे देता था। चाचाजी और मेरे दरमियान इस अनूठे ख़तो-किताबत का सिलसिला पूरे अड़तीस साल तक जारी रहा। यही कारण है कि मैं आज भी इस सरल लेकिन अव्यवहृत लिपि को पढ़ पाता हूँ। चाचाजी बिना नागा चिट्ठी लिखकर हालचाल पूछते रहते थे और मुझे भी बराबर चिट्ठी लिखते रहने की हिदायत देते रहते थे। उनकी सभी चिट्ठियाँ प्रायः एक जैसी होती थीं। उपरोक्त चिट्ठी को मैं देवनागरी में प्रस्तुत कर रहा हूँ। कोई ख़ास बात नहीं लिखी है इस चिट्ठी में लेकिन इसमें उनकी आत्मीयता और उनका निश्छल-निस्स्वार्थ प्रेम नहीं तो और क्या है?


     9-9-1992                             श्रीगणेशजी
श्रीपत्री चिरंजीव सीताराम प्रेम नारायण जोग लिखी बघौद सेती रामचंद्र श्यामलाल की राम-राम बंचना घने मान सेती आगे यहाँ पर सब राजी-खुशी हैंगे आपकी राजी-खुशी श्रीभगवान सेती हमेशा नेक चाहते हैंगे आगे चिट्ठी आपकी आई नहीं सोई देना ज़रूर चिट्ठी लिखने में आप देर कर देते हैं सोई चिट्ठी ज़रूर देना हमारे लायक सेवा हो सो लिखना चिरंजीव बच्चों को हमारी तरफ सेती प्यार करना आशीर्वाद देना चिट्ठी ज़रूर देना और ज्यादा क्या लिखें आप ख़ुद समझदार हैंगे बाकी सबको हाथ जोड़कर राम-राम बच्चों को प्यार करना सबकी राजी-खुशी लिखना
भादवा सुदी 13 संवत 2049

प्रस्तुति :

सीताराम गुप्ता
ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा,
दिल्ली-110034
फोन नं. 011-27313679/9555622323

srgupta54@yahoo.co.in

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