शुक्रवार, 18 मई 2012

प्रेम जनमेजय का पत्र

साहित्य जगत में रचनाकारों के पत्रों को प्रकाशित करने की परंपरा रही है. कई रचनाकारों के पत्र तो साहित्यिक दस्तावेज जैसे ही रहे हैं.

इसी परंपरा में रचनाकार.ऑर्ग को मिले पत्रों को स्कैन कर (उनकी स्वयं की हस्तलिपि में) प्रकाशित किया जा रहा है ताकि सनद रहे.

यदि आपके पास चर्चित व प्रसिद्ध साहित्यकारों के पत्र हैं तो उन्हें स्कैन कर रचनाकार.ऑर्ग को भेजें अथवा डाक द्वारा भेजें जिसे स्कैन कर यहाँ प्रकाशित किया जाएगा.

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1 blogger-facebook:

  1. मित्र, क्या ऑनलाइन कमाई की जा सकती है?

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