गुरुवार, 21 जून 2012

साताप्पा लहू चव्हाण का आलेख - इक्कीसवीं सदी की हिंदी वेब पत्रकारिता


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‘‘इक्कीसवीं सदी को ‘कम्प्यूटर सदी’ कहा जाने लगा है क्योंकि कम्प्यूटर (अभिकलत्र) महानगरों, नगरों, कस्बो के अधिकतकर लोगों के जीवन में प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः अपना स्थान बना चुका है। आए दिन कम्प्यूटर के नये-नये प्रयोगों के बारे में पत्र-पत्रिकाओं, समाचार - पत्रों, आकाशवाणी तथा दूरदर्शन आदि के माध्यम से सूचनाएँ मिलती रहती है। वास्तव में इक्कीसवीं सदी ‘कम्प्यूटर क्रांति’ (Computer Revolution)  की सदी के रुप में देखी जा रही है।’’1 ‘‘1946’’2 कम्प्यूटर का जन्मवर्ष माना जाता है। बिसवीं सदी के आठवें दशक में ही ‘सायबर स्पेस’ का बोलबाला हुआ। सन ‘‘1969’’3 में अमेरिका में पहली बार ‘इंटरनेट’ का प्रयाग हुआ। ‘‘1980’’4 के दशक के अंत में यह विभिन्न क्षेत्रों से जु ड गया। ‘‘1993 को व्यावसायीकरण होने के बाद तो इन्टरनेट का प्रयोग करनेवालों की बाढ-सी आ गई।’’5 इक्कीसवीं सदी में तो ‘इंटरनेट’ सभी क्षेत्रों पर छा गया। डॉ. शंकर बुंदेले कहते है, ‘‘ इंटरनेट ने जीवन के अंग-प्रत्यंग को प्रभावित कर लिया है।’’6

कहना आवश्यक नहीं कि ‘वेब पत्रकारिता’ इंटरनेट की ही देन है। इक्कीसवीं सदी में वेब पत्रकारिता साहित्यिक विधाओं के प्रचार प्रसार में प्रभावशाली भूमिका निभा रही है। इक्कीसवीं सदी में साहित्य की विभिन्न विधाओं की स्थिति एवं संभावनाओं का अध्ययन करना है तो ‘वेब पत्रकारिता’ का एक स्वतंत्र विधा के रुप में अध्ययन करना अनिवार्य है। www वर्ल्ड वाइड वेब (विश्वव्यापी तरंग) को साइबर स्पेस, सुपर हाइवे, इन्फोेर्मेशन सुपर हाइवे, द नेट और ऑन लाइन आदि नाम दिए हैं। डॅा. सुमित मोहन का कथन दृष्टव्य है, ‘‘ब्राउजिं ग अर्थात ज्ञानलोक का संचार, ई-बैंकिंग, ई-वाणिज्य, ई-प्रशासन, चैट-गपशप, खेल, मनोरंजन, ई कान्फ्रेंस, शिक्षा, पाक कला, आरोग्य .... जो भी गतिविधि याद आए सब इसमें है और जिन गतिविधयों की आपने कल्पना नहीं की होगी वह भी यहाँ है। केवल ‘सर्च’ करने की ज रुरत है।’’7 केवल ‘सर्च’ करने से हमारे सामने हर क्षेत्र की जानकारी प्रस्तुत होती है।

साहित्य क्षेत्र में तो ‘वेब पत्रकारिता’ के कारण नया आयाम प्रस्तुत हुआ है। अनामी शरण बाबल कहते हैं, ‘‘जहाँ तक भारत में वेब पत्रकारिता का सवाल है, उसे मात्र 10 वर्ष हुए है। ये 10 वर्ष कहने भर को है। दरअसल भारत की वेब पत्रकारिता अभी शिशु अवस्था में है और इसके पीछे दरअसल भारत में इंटरनेट की उपलब्धता, तकनीकी ज्ञान और रुझान का अभाव, अंग्रेजी की अनिवार्यता, नेट संस्करणों के प्रति पाठकों में संस्कार और रुचि का विकसित न होना तथा आम पाठकों की क्रय शक्ति भी है, भारत में इंटरनेट की सुविधा 1990 के मध्य में मिलने लगी। भारत में वेब पत्रकारिता के चेन्नई का ‘‘द हिंदु’’ पहला भारतीय अखबार है जिसका इंटरनेट संस्करण 1995 के जारी हुआ।’'8 कहना आवश्यक नहीं कि इक्कीसवीं सदी में वेब पत्रकारिता ज नमानस पर छा रही है। नये लेखकों को साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन करने हेतु आवाहन कर रही है।

अतः वेब पत्रकारिता एक स्वतंत्र विधा के रुप में सामने आ रही है। इसे नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान में वेब पत्रकारिता के विविध आयामों पर स्वतंत्र रुप से अनुसंधान करने की आवश्यकता है। ‘‘भारत में मोबाइल तकनीकी और फोन सेवा की संभावनाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के बडे टेलिकॉम ऑपरेटरों ने 3G (Three G)  सेवाओं के लाइसेंन के लिए हाल ही मे करीब 16 अबर डॉलर यानी 75,600 करोड रुपए की बोली लगाई। संचार मंत्रालय के एक आँकडे के मुताबिक देश में जू न 2010 तक मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या ६७ करोड तक पहुँच रई थी। यहाँ इस तथ्य पर गौर फरमाने की जरुरत यह है कि इन में से ज्यादातर फोन पर इंटरनेट सर्विस भी मौजूद है।’’9  अतः कहा जा सकता है कि वेब पत्रकारिता दिन-ब-दिन विकसित हो रही है। वेब पत्रकारिता में हर व्यक्ति एक संवाददाता है। व्यावसायिक - अव्यावसायिक रुप में कार्य करनेवाले अनेक साहित्यकार अपनी अपनी भाषा में अपने विचार प्रस्तुत कर रहें हैं। अतः साहित्य के क्षेत्र में वेब पत्रकारिता के कारण नया बदलाव परिलक्षित होता है, इसे नकारा नहीं जा सकता। ‘‘वेब पत्रकारिता, हाशिए के लोगों की आवाज के लिए एक वैकल्पिक मंच है।

वेब पत्रकारिता में ब्लॉग के माध्यम से तमाम लोगों को मंच मिल सकता है। जहाँ से ये अपनी बात आसानी से कह सकते हैं। अपनी पीडा को व्यक्त कर सकते हैं।’’10 कहना आवश्यक नहीं कि वेब पत्रकारिता प्रत्येक नागरिक की आवाज लोगों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध हो रही है। अब ब्लॅाग के माध्यम से अनेक लेखक अपनी बात लोगों के सामने रख रहें है। साहित्य की हर विधा का अध्ययन वेब पत्रकारिता के माध्यम से किया जा सकता है। ज यप्रकाश मानस कहते हैं, ‘‘अब ब्लॅाग (Blog) इंटरनेट पर केवल निजी अभिव्यक्ति या स्वयं को अभिव्यक्त करने या भडास उतारने मात्र का स्वतंत्र साधन नहीं रहा। वह धीरे धीरे सायबर जर्नलिज्म या ऑनलाइन   ज र्नलिज्म या इंटरनेट ज र्नलिज्म की शक्ल भी धारण करने लगा है जि से ‘सिटीज न     ज र्नलिज्म’ कहा जाने लगा है, चाहे इसे एक ही व्यक्ति या पत्रकार द्वारा संचालित किया जाय या फिर समूह में। .... ब्लागिंग पत्रकारिता जै से सामूहिक बोध का जरिया भी बन 
सकता है।’’11

कहना आवश्यक नहीं कि ऑनलाइन पत्रकारिता के माध्यम से आमजनता के प्रश्नों को अभिव्यक्ति मिल रही है। साहित्य की विभिन्न विधाओं का प्रचार प्रसार हो रहा है, इसे नकारा नहीं जा सकता। हिंदी नेस्ट, सृजनगाथा, अभिव्यक्ति, शब्दांजली, साहित्य कुंज, छाया, गर्भनाला, भारत दर्शन, वेब दुनिया, ताप्तीलोक, कृत्या, रचनाकार, कलायन, आदि वेब साहित्यिक पत्रिकाओं के साथ हंस, वागर्थ, तद्भव, नया ज्ञानोदय मधुमती के साथ साथ अनेक अखबार वेब पत्रकारिता के अविभाज्य अंग बन चुके हैं। इसमें दो राय नहीं। रवि रतलामीजी का रचनाकार ब्लॅाग, सुनील दीपक जी  का कल्पना ब्लॉग, मालवा ब्लॅाग, चिट्ठा चर्चा, सृज नसम्मान आदि ब्लॅाग साहित्यिक विधाओं को इक्कीसवीं सदी में नया आयाम प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें है। इसे मानना होगा।

निष्कर्ष :-
इक्कीसवीं सदी में वेब पत्रकारिता की स्थिति मजबूत तथा सभी क्षेत्रों का लेखाजोखा प्रस्तुत करने में व्यक्त रही नजर आती है। कथात्मक तथा कथेत्तर साहित्य के साथ कविता, पत्र, डायरी, संस्मरण जैसी विधाओं को हाशिए के लोगों तक पहुँचानेवाली स्वतंत्र प्रणाली के रुप में वेब पत्रकारिता को देखना उचित होगा। घर में एक जगह बैठकर विश्वभर की जानकारी वेब पत्रकारिता के माध्यम से प्राप्त हो रही है। वेब पत्रकारिता के माध्यम से व्यक्ति स्वतंत्र रुप में अपनी अभिव्यक्ति देने में सफल हुआ दृष्टिगोचर होता है। हिंदी की ऑनलाइन पत्रकारिता की स्थिति एवं संभावनाओं का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि वेब पत्रकारिता को सकारात्मक भविष्य प्राप्त होगा।

जिस तरह बीसवीं सदी में इलेक्ट्नॉनिक और प्रिंट पत्रकारिता का स्वतंत्र विधा के रुप में अनुसंधान हुआ, ठीक उसीप्रकार इक्कीसवीं सदी में वेब पत्रकारिता का स्वतंत्र विधा के रुप में अनसंधान होना आवश्यक है। वेब पत्रकारिता को एक वैकल्पिक मंच न मानकर इक्कीसवीं सदी की नई विधा के रुप में मान्यता देना उचित होगा। साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रतिभासंपन्न साहित्यकारों के विचारों को प्रस्तुति मिली है लेकिन वेब पत्रकारिता में प्रतिभासंपन्न साहित्यकारों के साथ साथ आमआदमी भी अपने विचार निडरतासे विभिन्न ब्लॉग के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा है। आम आदमी वेब पत्रकारिता के माध्यम से सुदूर पहुँच रहा है। कम-अधिक मात्रा में वैश्विकरण की प्रक्रिया गहीमान हो रही है। अतः वेब पत्रकारिता की स्थिति दिन-ब-दिन मज बूत होती नजर आती है, इसमें दो राय नहीं.

संदर्भ - संकेत -
1.    डॉ. महेन्द्रसिंह राणा - प्रयोजनमूलक हिंदी के आधुनिक आयाम, पृष्ठ-390
2.    वही, पृष्ठ - 391
3.    वही, पृष्ठ - 402
4.    वही, पृष्ठ - 402
5.    वही, पृष्ठ - 402
6.    सं. ज्योतिव्यास - हिंदी भाषा विकास में आधुनिक जनसंचार माध्यमों की भूमिका, पृष्ठ- 136
7.    सुमित मोहन - मीडिया लेखन, पृष्ठ-101
8.    www.asbmassindia.blogspot.in. dated 18/2/12
9.    वही,  dated 17/2/12.
10.    सं. हंसराज, एस. विक्रम - वेब पत्रकारिता, पृष्ठ-8
11.    वही, पृष्ठ-125

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डॉ. साताप्पा लहू चव्हाण
सहायक प्राध्यापक
स्नातकोत्तर हिंदी विभाग,
अहमदनगर महाविद्यालय,
अहमदनगर 414001. (महाराष्ट्न)
Mob - 09850619074
E-mail - drsatappahavan@gmail.com.

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